आरव शर्मा
नई दिल्ली (शिखर समाचार)। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने राष्ट्रीय राजधानी में पर्यावरणीय स्थिरता और जल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की है। उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने आज ‘जल संचय अभियान’ की शुरुआत की, जिसके तहत दिल्लीभर के 101 पारंपरिक जलाशयों का जीर्णोद्धार और संरक्षण किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गिरते भूजल स्तर को सुधारना और पारिस्थितिक संतुलन बनाना है।
पश्चिम विहार से अभियान की शुरुआत
पश्चिम दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित डिस्ट्रिक्ट पार्क में आयोजित उद्घाटन समारोह के दौरान इस मुहिम को हरी झंडी दिखाई गई। इस अवसर पर क्षेत्र के विधायक करनैल सिंह और डीडीए के उपाध्यक्ष एन. सरवना कुमार भी मौजूद रहे। अभियान के पहले चरण में लगभग 155 हेक्टेयर (383 एकड़) क्षेत्र में फैले 101 जलाशयों को पुनर्जीवित किया जाएगा।
इनमें द्वारका जोन के 22, साउथ जोन के 13, रोहिणी जोन के 17 और नरेला जोन के 6 जलाशय शामिल हैं। इसके अलावा, कार्यक्रम स्थल डिस्ट्रिक्ट पार्क के करीब 1.47 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जलाशय का भी कायाकल्प किया जाएगा।
भूजल स्तर सुधारने और हरित दिल्ली पर जोर
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समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह अभियान केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिस्थितिक बहाली और सतत शहरी विकास की दिशा में एक गंभीर प्रयास है। वहीं विधायक करनैल सिंह ने आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने की जरूरत पर जोर देते हुए इसे हरित और स्वस्थ दिल्ली की दिशा में बड़ा कदम बताया।
डीडीए के अनुसार, इस अभियान का मकसद पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर जल संरक्षण को बढ़ावा देना और राजधानी में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।
दो चरणों में पूरा होगा अभियान
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गौरतलब है कि डीडीए वर्तमान में दिल्ली में कुल 822 जलाशयों का प्रबंधन करता है, जिनमें से 424 की पहचान बहाली और संरक्षण कार्य के लिए की गई है। चालू अभियान के तहत पहले चरण के लिए निर्धारित 101 जलाशयों को मानसून से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए गाद निकालने, खुदाई करने और प्राकृतिक जलभराव मार्गों की सफाई जैसे तात्कालिक कार्य शुरू कर दिए गए हैं। पहले चरण को पूरा करने की समयसीमा 30 अगस्त 2026 तय की गई है। इसके बाद दूसरे चरण का कार्य मई 2027 तक चलेगा, जिसमें एसटीपी प्लांट लगाना, बाड़ लगाना और बड़े पैमाने पर पौधारोपण जैसे दीर्घकालिक सुरक्षात्मक कार्य किए जाएंगे।
