बिजनौर जिला कारागार में फिर मातम, 10 दिन में दूसरी मौत से मचा हड़कंप

Rashtriya Shikhar
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“Mourning again at Bijnor district jail; second death in 10 days causes alarm.” IMAGE CREDIT TO POLICE

बिजनौर (शिखर समाचार)। जिला कारागार में एक बार फिर मातम पसर गया है। अभी गत 10 मई को बंदी दीपक द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की घटना की गूंज शांत भी नहीं हुई थी कि शनिवार सुबह जेल से एक और दर्दनाक खबर सामने आ गई। मेरठ निवासी विचाराधीन बंदी अरुण कुमार की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। मात्र दस दिन के भीतर लगातार हुई इन दो घटनाओं ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली, सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एएसपी सिटी कृष्ण गोपाल सिंह के अनुसार, मेरठ के शास्त्री नगर निवासी अरुण कुमार (45 वर्ष) पुत्र बृजकिशोर चोरी के एक मामले में गत 13 अप्रैल से जिला कारागार में बंद था। उसे बिजनौर थाना पुलिस द्वारा जेल भेजा गया था और वह जेल की बैरक नंबर-2 में निरुद्ध था।

जेलर रवींद्र नाथ ने बताया कि

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जेलर रवींद्र नाथ ने बताया कि शनिवार सुबह रोजाना की तरह अरुण कुमार ने बैरक में नाश्ता किया था, लेकिन कुछ ही देर बाद उसने अचानक तेज बेचैनी और घबराहट की शिकायत की। साथी बंदियों ने उसकी हालत बिगड़ती देख तुरंत जेल प्रशासन को सूचना दी।
इसके बाद आनन फानन में अरुण को जेल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। हालत गंभीर होने पर उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

बंदी की मौत की खबर मिलते ही

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बंदी की मौत की खबर मिलते ही जेल प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। शहर कोतवाली पुलिस ने जिला अस्पताल पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों ने अस्पताल और जेल प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
उधर, घटना की सूचना मिलते ही मृतक के परिवार में कोहराम मच गया। परिजन बिजनौर के लिए रवाना हो गए हैं।
लगातार दूसरी मौत के बाद जिला कारागार की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में आ गई हैं। स्थानीय लोगों और बंदियों के परिजनों का कहना है कि महज दस दिन में दो मौतें होना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है। कैदियों की नियमित स्वास्थ्य जांच और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस नेता मुनीष त्यागी ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे जिला कारागार की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

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