महिला सशक्तिकरण पर राजनीति न हो: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

Rashtriya Shikhar
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“No politics should be done on women empowerment,” said Chief Minister Pushkar Singh Dhami. IMAGE CREDIT INFORMATION DEPARTMENT

सन्दीप शर्मा
देहरादून (शिखर समाचार)।

महिला सशक्तिकरण पर राजनीति से ऊपर उठने की अपील

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र ‘नारी सम्मान लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित करते हुए महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक को जल्द लागू करने के लिए सभी दलों को एकमत होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारियों और नारी शक्ति के प्रतीक रूप में जानी जाने वाली गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन और कमला पंत को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करने में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को बताया युगांतकारी कदम

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मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को देवी स्वरूप मानकर उसकी पूजा की जाती है। इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और कल्पना चावला जैसी महिलाओं ने अपने साहस और योगदान से समाज को नई दिशा दी है। आज नारी केवल सहभागिता तक सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ रही है।

उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को युगांतकारी कदम बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2023 में लाया गया यह प्रावधान महिलाओं की भागीदारी को नीति निर्माण में सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस ऐतिहासिक बिल को संसद में पारित नहीं होने दिया और इस पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है।

महिला सशक्तिकरण योजनाओं और राज्य सरकार की पहल

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मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह समर्पित है। बीते वर्षों में जेंडर बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और महिला कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना जैसी योजनाओं से महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं।

उन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कानून को मुस्लिम महिलाओं के लिए बड़ी राहत बताते हुए कहा कि इससे उन्हें सामाजिक अन्याय से मुक्ति मिली है। उत्तराखंड में राज्य सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयासरत है। स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन, ब्याज-मुक्त ऋण योजनाएं और लखपति दीदी जैसी पहलें महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। राज्य में सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर इस विषय पर सहयोग करें ताकि महिलाओं को उनका उचित अधिकार मिल सके।

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