अरणि गौड़
नई दिल्ली (शिखर समाचार)
तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के पनैयूर क्षेत्र में 8,000 से 12,000 वर्ष पुराने जीवाश्म (फॉसिल) स्थल की महत्वपूर्ण खोज हुई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह जीवाश्म स्थल मध्य से उत्तर होलोसीन काल से संबंधित है।
यह क्षेत्र पनैयूर में स्थित है, जो वर्ष 2023 की भारी बारिश के बाद हुए मिट्टी कटाव के कारण उजागर हुआ। इसके बाद जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने मौके पर पहुंचकर विस्तृत सर्वेक्षण किया और वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए इसकी पुष्टि की।
बारिश के बाद सामने आया प्राचीन जीवाश्म स्थल
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार वर्षा और कटाव के चलते यह पुराना भू-भाग सतह पर आ गया, जिससे एक महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक स्थल का पता चला। प्रारंभिक अध्ययन में इसे उत्तर होलोसीन काल से जोड़ा गया है।
भारत के जीवाश्म रिकॉर्ड में बड़ा योगदान
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह खोज भारत के क्वाटरनरी काल के जीवाश्म रिकॉर्ड को समृद्ध करती है। इससे प्राचीन वन्यजीवन, पर्यावरण और जलवायु परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
जलवायु और जैव विविधता अध्ययन में अहम
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज केवल भूविज्ञान और पुरातत्व के लिए ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के ऐतिहासिक अध्ययन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
सरकार ने इस खोज को भारत की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया है।
