धर्म, सत्य और वैराग्य का संदेश देती श्रीमद्भागवत कथा

Rashtriya Shikhar
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“Shrimad Bhagwat Katha conveys the message of धर्म (righteousness), truth, and detachment.” IMAGE CREDIT TO रिपोर्टर

मुरादनगर (शिखर समाचार)। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समिति के तत्वावधान में विजय मंडी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर कथाव्यास मुकेश कुमार शास्त्री ने महाभारत प्रसंग, श्रीमद्भागवत के 24 अवतारों तथा शुकदेव जी के जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया।

महाभारत और भागवत के संदेश का किया वर्णन

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कथाव्यास ने कहा कि महाभारत केवल युद्ध की कथा नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और कर्तव्य का संदेश देने वाला महान ग्रंथ है। उन्होंने श्रीमद्भागवत में वर्णित भगवान विष्णु के 24 अवतारों की महिमा बताते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ा, तब-तब भगवान ने विभिन्न अवतार धारण कर भक्तों की रक्षा की और धर्म की स्थापना की।

शुकदेव जी के जन्म और वैराग्य की कथा

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उन्होंने बताया कि महर्षि वेदव्यास ने कठोर तपस्या कर ऐसे पुत्र की कामना की थी, जो जन्म से ही ज्ञानी, वैराग्यवान और ब्रह्मज्ञानी हो। भगवान की कृपा से उनके यहां शुकदेव जी का जन्म हुआ। शुकदेव जी लगभग 12 वर्षों तक अपनी माता के गर्भ में रहे, क्योंकि उन्हें भय था कि संसार में आते ही मनुष्य माया-मोह में फंस जाता है।

इसके बाद शुकदेव जी गर्भ से बाहर आए और जन्म लेते ही वे पूर्ण युवा अवस्था में वन की ओर तपस्या के लिए प्रस्थान कर गए। महर्षि वेदव्यास उनके पीछे-पिछे पुत्र-पुत्र कहकर पुकारते रहे, लेकिन शुकदेव जी संसारिक संबंधों से परे थे।

वैराग्य और ब्रह्मज्ञान के प्रसंग से श्रद्धालु भावविभोर

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कथा के दौरान उस प्रसंग का भी वर्णन किया गया जब वन में सरोवर में स्नान कर रही स्त्रियों ने शुकदेव जी को देखकर वस्त्र धारण नहीं किए, जबकि वेदव्यास के आने पर उन्होंने संकोच किया। इस प्रसंग के माध्यम से शुकदेव जी के परम वैराग्य और ब्रह्मज्ञान का वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

कथा के समापन पर आरती एवं भजन-कीर्तन के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुभूति के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

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