साधो बैंड की धुनों ने बिखेरी सांस्कृतिक रंगत, प्रदर्शनी में देर तक गूंजती रही तालियों की आवाज

Rashtriya Shikhar
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Sadho band's melodies spread cultural colors, applause echoed for long at the exhibition IMAGE CREDIT TO Agriculture Department

बिजनौर (शिखर समाचार) जिला कृषि, औद्योगिक एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनी में रविवार का दिन संगीत और संस्कृति के नाम रहा। इंदिरा बाल भवन में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में देशभर में लोक-पॉप के लिए प्रसिद्ध साधो बैंड ने ऐसी प्रस्तुति दी कि दर्शक झूम उठे। बैंड के गीतों की लय और तालियों की गूंज ने माहौल को उत्सव जैसा बना दिया।

भक्ति से लेकर सूफी तक: साधो बैंड की संगीतमय यात्रा ने बाँधा हर दिल

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कार्यक्रम का आरंभ भक्ति रस से हुआ। मेरी कुटिया में आज राम आएंगे और शिव स्तुति जैसे गीतों ने पूरे पंडाल को आध्यात्मिक वातावरण से भर दिया। इसके बाद एक पल चैन न आवे और सजना तेरे बिना जैसे गीतों पर दर्शक मंत्रमुग्ध होकर तालियां बजाते रहे। साधो बैंड ने लोक संगीत को आधार बनाकर सूफी, कव्वाली और ग़ज़ल जैसी शैलियों का अनोखा संगम पेश किया, जिसने हर वर्ग के श्रोताओं को अपनी ओर खींच लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष इंदिरा सिंह ने की। संचालन वीरेंद्र कुमार ने संभाला। इस अवसर पर नहटौर से तीन बार विधायक रहे ओम कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं भाजपा नेता डॉ. बीरबल सिंह, अधिशासी अधिकारी विकास कुमार और सुमित सिंघल विशिष्ट अतिथि के तौर पर मंच पर मौजूद रहे। आयोजन में सभासद कांति देवी, वंदना अग्रवाल, लक्ष्मी वर्मा, रीता चौधरी, राहुल नील, राजीव सोती और तिलकधारी सक्रिय भूमिका में दिखे।

धुनों के सारथी: धनंजय के नेतृत्व में साधो बैंड ने रचा सुरों का जादू

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साधो बैंड की टीम में कुल नौ कलाकार शामिल रहे। बैंड का नेतृत्व धनंजय ने किया, जबकि मयंक और जतिन ने संगीत संयोजन से कार्यक्रम में नई ऊर्जा भरी। दर्शकों में उत्साह का आलम यह था कि प्रस्तुति समाप्त होने के बाद लोग कलाकारों के साथ फोटो और सेल्फी लेने के लिए उमड़ पड़े।

सांस्कृतिक विविधता और परंपरा की झलक समेटे यह प्रस्तुति प्रदर्शनी की अब तक की सबसे यादगार शाम के रूप में दर्ज हो गई। साधो बैंड की अनूठी धुनें देर तक दर्शकों के कानों और दिलों में गूंजती रहीं।

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