——-गार्डेनिया, फ्यूटेक और गौतम समिति पर शिकंजा; आवंटन होंगे निरस्त, नीलाम होंगी डिफ़ॉल्ट संपत्तियां
आरव शर्मा
गाजियाबाद (शिखर समाचार)। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने गाजियाबाद में अरबों रुपये के बकायेदारों के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। वसुंधरा योजना में करोड़ों रुपये दबाकर बैठे बड़े डिफॉल्टरों से वसूली के लिए परिषद की विशेष टीम प्रवर्तन दल (प्रवर्तन दस्ता) के भारी लाव-लश्कर के साथ सीधे बकायेदारों की संपत्तियों पर आ धमकी। विभाग की इस अचानक और आक्रामक कार्रवाई से बड़े बिल्डरों और डिफ़ॉल्टरों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि पाई-पाई का भुगतान तत्काल नहीं हुआ, तो संपत्तियों को सील करने के साथ-साथ कुर्की और आरसी (वसूली प्रमाण पत्र) जारी करने की अंतिम वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अरबों के बकाये पर कुंडली मारे बैठे हैं ये बड़े नाम:
° गार्डेनिया इंडिया लिमिटेड: लगभग ₹157 करोड़ का भारी-भरकम बकाया
° फ्यूटेक प्राइवेट लिमिटेड: करीब ₹139 करोड़ की देनदारी
° गौतम सहकारी समिति: लगभग ₹19 करोड़ का बकाया
कार्रवाई के दौरान कई ऐसी डिफ़ॉल्ट संपत्तियां भी चिन्हित की गईं, जिनका आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निरस्त की गई इन संपत्तियों को आवास विकास परिषद अब सार्वजनिक नीलामी के जरिए बेचकर अपने राजस्व की भरपाई करेगा।
अधिकारियों के तेवर तल्ख: सीधे चेतावनी
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“बकाया दबाकर बैठना भूल जाएं, आगामी सप्ताह में सीधे सीलिंग और आरसी कटेगी”
“परिषद की बकाया धनराशि जनता और विकास की अमानत है। वर्षों से करोड़ों रुपये दबाकर बैठे बकायेदार तत्काल अपना संपूर्ण बकाया जमा कराएं। आगामी सप्ताह से किसी को कोई मोहलत नहीं मिलेगी; संपत्तियों की सीलिंग, आवंटन निरस्तीकरण और वसूली प्रमाण पत्र (आरसी) जारी कर प्रशासन के माध्यम से कठोर वसूली कराई जाएगी। साथ ही, आम बायर्स से स्पष्ट अपील है कि किसी भी संस्था या बिल्डर से संपत्ति खरीदने से पहले परिषद कार्यालय आकर उसके बकाये की स्थिति जरूर जांच लें, अन्यथा किसी भी कानूनी या वित्तीय नुकसान के लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे।”
— अनिल कुमार सिंह, उप आवास आयुक्त (मेरठ जोन)
“कोई समझौता नहीं होगा, बड़े अभियान में नपेंगे सभी डिफॉल्टर”
“बकायेदारों को स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि परिषद के बकाये को लेकर अब कोई रियायत या समझौता नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक रूप लेगा। वसुंधरा के बाद यह महा-अभियान सिद्धार्थ विहार और मंडोला योजना में भी उसी सख्ती से चलेगा। हर डिफ़ॉल्टर की संपत्ति चिन्हित है, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”

“परिषद की बकाया धनराशि जनता और विकास की अमानत है। वर्षों से करोड़ों रुपये दबाकर बैठे बकायेदार तत्काल अपना संपूर्ण बकाया जमा कराएं। आगामी सप्ताह से किसी को कोई मोहलत नहीं मिलेगी; संपत्तियों की सीलिंग, आवंटन निरस्तीकरण और वसूली प्रमाण पत्र (आरसी) जारी कर प्रशासन के माध्यम से कठोर वसूली कराई जाएगी। साथ ही, आम बायर्स से स्पष्ट अपील है कि किसी भी संस्था या बिल्डर से संपत्ति खरीदने से पहले परिषद कार्यालय आकर उसके बकाये की स्थिति जरूर जांच लें, अन्यथा किसी भी कानूनी या वित्तीय नुकसान के लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे।”
— अनिल कुमार सिंह, उप आवास आयुक्त (मेरठ जोन)
— पी.एस. रावत, संपत्ति प्रबंधक (गाजियाबाद)
जिला प्रशासन से जल्द मुलाकात, चलेगा संयुक्त महा-अभियान
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परिषद के उच्चाधिकारी अपनी बकाया धनराशि की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही गाजियाबाद जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधी मुलाकात करने जा रहे हैं। प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर आरसी के जरिए बकायेदारों की अन्य संपत्तियों की कुर्की और सख्त कानूनी प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा। परिषद के इस आक्रामक रुख से साफ है कि सिद्धार्थ विहार, वसुंधरा और मंडोला में वर्षों से बकाया डकारने वाले डिफ़ॉल्टरों की अब खैर नहीं है।

“बकायेदारों को स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि परिषद के बकाये को लेकर अब कोई रियायत या समझौता नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक रूप लेगा। वसुंधरा के बाद यह महा-अभियान सिद्धार्थ विहार और मंडोला योजना में भी उसी सख्ती से चलेगा। हर डिफ़ॉल्टर की संपत्ति चिन्हित है, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”
— पी.एस. रावत, संपत्ति प्रबंधक (गाजियाबाद)
