थानाभवन/शामली (शिखर समाचार)। कस्बा जलालाबाद से रविवार को पूज्य वाक्ककेसरी आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महामुनिराज का बैंड-बाजों के साथ भव्य मंगल प्रवेश शामली स्थित दिगंबर जैन धर्मशाला में हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर आचार्य श्री का भावभीना स्वागत किया। पूरे नगर में धार्मिक उल्लास और भक्ति का वातावरण बना रहा।
मंगल प्रवेश और दीक्षा दिवस समारोह
रविवार को आचार्य श्री का दसवां दीक्षा दिवस भी शामली में अत्यंत श्रद्धा एवं भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में शामली सहित पानीपत, करनाल, दिल्ली, सरूरपुर, बड़ौत और कैराना समेत विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और प्रवचन सुनकर धर्म लाभ प्राप्त किया।
अपने मंगल प्रवचन में आचार्य विनिश्चय सागर महामुनिराज ने कहा कि जीवन को महान बनाने के लिए केवल घर, साधन और बाहरी सुख-सुविधाओं को सजाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व और जीवन मूल्यों का विकास करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने घर को सुंदर बनाने में बहुत परिश्रम करता है, लेकिन यदि उसी प्रयास का कुछ भाग अपने जीवन को संवारने में लगाए तो उसका जीवन श्रेष्ठ बन सकता है।
विचार परिवर्तन से होता है जीवन का निर्माण
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उन्होंने कहा कि मनुष्य की योग्यता ही उसके जीवन का निर्माण करती है। जीवन में परिवर्तन केवल स्थान बदलने से नहीं, बल्कि विचारों और व्यवहार में बदलाव लाने से आता है। शिक्षा और सही समझ व्यक्ति को हर परिस्थिति में सहज व्यवहार और संवाद करना सिखाती है।
कार्यक्रम के दौरान शामली जैन समाज के श्रद्धालुओं ने गुरु आशीर्वाद प्राप्त कर भक्ति एवं उल्लास के साथ आयोजन का आनंद लिया।
