मोदीनगर (शिखर समाचार)।
थाना साहिबाबाद पुलिस ने एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीन (सीडीएम) को हैक कर साइबर फ्रॉड के जरिए लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश करते हुए 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से चार लाख रुपये नकद, घटना से खरीदी गई एक स्कॉर्पियो कार, वारदात में प्रयुक्त एक सेंट्रो कार, मोबाइल फोन तथा अन्य तकनीकी उपकरण बरामद किए। यह गिरोह उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सक्रिय था और लंबे समय से बैंकों की कैश डिपॉजिट मशीनों को निशाना बनाकर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था।
बीती 21 जुलाई 2026 को राजेंद्र नगर स्थित केनरा बैंक शाखा के शाखा प्रबंधक ने थाना साहिबाबाद में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया कि बैंक की कैश डिपॉजिट मशीन में 27 जून से 29 जून 2026 के बीच अज्ञात व्यक्तियों द्वारा छेड़छाड़ कर मशीन को हैक किया गया और उसमें जमा की गई नकदी को धोखाधड़ी से निकाल लिया गया। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमों का गठन किया। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय सूचना तंत्र आदि की मदद से अभियुक्तों की गतिविधियों पर नजर रखी। 21 और 22 जुलाई की रात को मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने रेलवे स्टेशन साहिबाबाद के पास बने अंडरपास क्षेत्र में घेराबंदी कर गैंग के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान अभियुक्तों के पास से चार लाख रुपये नकद, दो कारें और साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जाने वाले कई उपकरण बरामद किए गए।
स्मार्ट प्लग और मोबाइल ऐप की मदद से देते थे वारदात को अंजाम
पुलिस पूछताछ में अभियुक्तों ने कि वह वारदात से पहले एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीनों की बिजली आपूर्ति प्रणाली में एक स्मार्ट प्लग लगा देते थे। इस स्मार्ट प्लग को मोबाइल फोन में इंस्टॉल किए गए स्मार्ट लाइफ एप्प के माध्यम से नियंत्रित किया जाता था। जब कोई ग्राहक मशीन में नकदी जमा करता था या अन्य लेन-देन करता था, उसी समय वह मोबाइल एप्प की मदद से मशीन की कार्यप्रणाली को बाधित कर देते थे। इसके कारण मशीन में जमा की गई नकदी मशीन की ट्रे में जाने के बजाय ऊपरी हिस्से में फंस जाती थी। ग्राहक को यह विश्वास हो जाता था कि उसकी नकदी जमा हो गई है और वह वहां से चला जाता था। बाद में वह विशेष रूप से तैयार किए गए औजारों की मदद से मशीन खोलकर फंसी हुई नकदी निकाल लेते थे। वारदातों को अंजाम देने के लिए वह विशेष समय का चयन करते थे। वह अधिकतर बैंक खुलने से पहले या सार्वजनिक अवकाश के दिनों में मशीनों को निशाना बनाते थे, ताकि उनकी गतिविधियों पर किसी का ध्यान न जाए। गैंग में शामिल अहसान और सिराज मशीनों को हैक करने का काम करते थे, जबकि आरिफ और रहीश आसपास निगरानी रखते थे। उनका काम यह सुनिश्चित करना था कि किसी व्यक्ति को उनके अपराध की भनक नहीं लगे और पुलिस या बैंक कर्मचारी मौके पर न पहुंच सकें। संवाददाता सम्मेलन में डीसीपी सुरेंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि अभियुक्तों ने दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।
चारों आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
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गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान अहसान, आरिफ, सिराज और रहीश के रूप में हुई है। इनमें से कुछ अभियुक्त हरियाणा के नूंह जिले के निवासी हैं, जबकि एक अभियुक्त दिल्ली क्षेत्र का रहने वाला है। पुलिस अब इनके नेटवर्क और अन्य संभावित साथियों की जानकारी जुटाने में लगी हुई है। अहसान के खिलाफ दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा और साहिबाबाद क्षेत्र में 11 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं आरिफ के खिलाफ दो, सिराज के खिलाफ चार और रहीश के खिलाफ आठ आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस इनके अन्य आपराधिक मामलों की भी जांच कर रही है और विभिन्न राज्यों की पुलिस से संपर्क कर इनके आपराधिक रिकॉर्ड का सत्यापन करने में जुटी है।
