नई दिल्ली (शिखर समाचार)। नाट्य मूर्ति स्कूल ऑफ डांस द्वारा 14 मई की देर शाम आयोजित नृत्य उपासना कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना की मनमोहक झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी की आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। अब्दुल खालिद और उनके शिष्यों द्वारा प्रस्तुत नृत्यांजलि को दर्शकों ने खूब सराहा।
भारतीय संस्कृति और नृत्य साधना का अद्भुत संगम
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और नृत्य साधना के आध्यात्मिक स्वरूप को मंच पर जीवंत करना था। कलाकारों ने भाव, लय, ताल और अभिनय के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गहराई और सांस्कृतिक गरिमा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। मंच सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा और शास्त्रीय संगीत ने कार्यक्रम को और भव्य बनाया।
दर्शकों को बताया गया कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य केवल मंचीय कला नहीं बल्कि आत्मा, मन और शरीर को जोड़ने वाली साधना है। नृत्य उपासना इसी भावना को समर्पित प्रस्तुति रही, जिसमें नृत्य को ईश्वर आराधना और आत्म अनुभूति के माध्यम के रूप में पेश किया गया।
अब्दुल खालिद की कला यात्रा और गुरु प्रशिक्षण
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कार्यक्रम के केंद्र में प्रसिद्ध शास्त्रीय नर्तक एवं गुरु अब्दुल खालिद रहे। उन्होंने अपने शिष्यों के साथ भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी की प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर किया। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के कप्तानगंज क्षेत्र से संबंध रखने वाले अब्दुल खालिद ने बचपन में दूरदर्शन पर अभिनेत्री श्रीदेवी की प्रस्तुतियों से प्रेरणा लेकर नृत्य की दुनिया में कदम रखा।
उन्होंने दिल्ली में पद्म विभूषण सोनल मानसिंह से पंडानल्लूर शैली में भरतनाट्यम का प्रशिक्षण प्राप्त किया, जबकि कुचिपुड़ी की शिक्षा पद्म भूषण राजा रेड्डी, राधा रेड्डी और कौशल्या रेड्डी से हासिल की। महान नृत्यांगना यामिनी कृष्णमूर्ति को वे अपना मानसिक गुरु मानते हैं और उनकी कला शैली से गहराई से प्रभावित हैं।

शिक्षा, साधना और सांस्कृतिक प्रेरणा
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अब्दुल खालिद पिछले दस वर्षों से नाट्य मूर्ति स्कूल ऑफ डांस के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की शिक्षा दे रहे हैं और निरंतर वार्षिक प्रस्तुतियों का आयोजन कर रहे हैं। महामारी के कठिन दौर में भी उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण जारी रखकर कला साधना की परंपरा को जीवित रखा।
देर शाम तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन में दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों पर जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम ने न केवल भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सौंदर्यपूर्ण परंपरा को जीवंत किया, बल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और कला से जुड़ने का प्रेरणादायी संदेश भी दिया।
