एमएसपी खरीद में एकरूपता के लिए राष्ट्रीय किसान डाटाबेस जरूरी: अशोक बालियान

Rashtriya Shikhar
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To ensure uniformity in MSP procurement, a national farmer database is necessary, said Ashok Balyan. IMAGE CREDIT TO अशोक बालियान फाइल फोटो

मुजफ्फरनगर (शिखर समाचार)। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने केंद्र सरकार से देशभर में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कृषि उपज की खरीद के लिए राष्ट्रीय किसान डाटाबेस बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे राज्यों के बीच फसल बिक्री में आने वाली बाधाएं समाप्त होंगी और किसानों को एक समान अवसर मिल सकेगा।

एमएसपी व्यवस्था में एकरूपता की मांग

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अशोक बालियान ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर एमएसपी खरीद व्यवस्था में एकरूपता लाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि “एक राष्ट्र, एक बाजार” की अवधारणा अभी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है, क्योंकि कृषि और मंडियों का संचालन राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

पत्र में उन्होंने बताया कि अलग-अलग राज्यों में एमएसपी खरीद के नियम और पंजीकरण प्रक्रियाएं भिन्न हैं। इसके चलते उत्तर प्रदेश के किसान हरियाणा जैसे राज्यों के सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी फसल नहीं बेच पाते, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर सीमित हो जाते हैं।

राष्ट्रीय पोर्टल और डाटाबेस का सुझाव

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बालियान ने वर्ष 2020 के कृषि कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय किसानों को मंडियों के बाहर और राज्यों की सीमाओं के पार फसल बेचने की स्वतंत्रता देने का प्रयास किया गया था। हालांकि कानून वापस ले लिए गए, लेकिन “एक देश, एक बाजार” का लक्ष्य अभी भी अधूरा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि ई-नाम (e-NAM) के उन्नत स्वरूप के रूप में एक राष्ट्रीय पोर्टल विकसित किया जाए, जिससे किसान अन्य राज्यों की मंडियों में पहले से स्लॉट बुक कर अपनी उपज बेच सकें।

सभी किसानों के लिए एकीकृत व्यवस्था की मांग

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उन्होंने हरियाणा की “मेरी फसल, मेरा ब्यौरा” योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे अन्य राज्यों के किसानों के लिए भी खोला जाना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय किसान डाटाबेस तैयार होने से सभी किसानों का एकीकृत रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे वे देश के किसी भी हिस्से में एमएसपी पर अपनी उपज बेच सकेंगे।

अंत में उन्होंने पारदर्शी अंतरराज्यीय व्यापार नीति लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इससे राज्यों के बीच विवाद कम होंगे और किसानों को व्यापक और बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा।

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