हापुड़ (शिखर समाचार)। जनपद के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान एसएसवी डिग्री कॉलेज का नाम एक बड़े विवाद में घिर गया है। कॉलेज प्रबंधन पर शिक्षकों के भविष्य निधि (पीएफ) फंड में करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ ने कॉलेज प्रबंधन को कड़ा शो-कॉज नोटिस जारी करते हुए 7 दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
लगातार शिकायतों के बाद एक्शन में आया ईपीएफओ
संगठन को मिले नोटिस के अनुसार, कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार वर्मा, डॉ. सुलभ चिटकारा, डॉ. अतुल कुमार गोयल, डॉ. सुधीर कुमार, संजय कुमार, डॉ. कुलदीप कुमार और डॉ. राखी गुप्ता ने 17 सितंबर 2025 से लेकर सितंबर 2026 के बीच विभिन्न तारीखों में ईपीएफओ के पास लिखित शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिक्षकों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन हर महीने उनके वेतन से पीएफ की राशि तो काटता है, लेकिन उसे उनके पीएफ खातों में जमा नहीं किया जाता है। इस मामले में ईपीएफओ द्वारा 2 जुलाई, 17 जुलाई और 3 अगस्त 2026 को कॉलेज को तीन बार पत्र भेजे गए थे, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद यह नोटिस जारी करना पड़ा।
नोटिस में लगाए गए प्रमुख बिंदु:
वेतन से कटौती के बाद भी पीएफ गायब: शिक्षकों के वेतन से पीएफ का पैसा लगातार काटा गया, लेकिन यह ईपीएफओ के रिकॉर्ड में जमा नहीं मिला।
कम पीएफ अंशदान: शिक्षकों की वेतन पर्ची में मूल वेतन अधिक दर्शाया गया, जबकि पीएफ का अंशदान बहुत कम राशि पर जमा किया गया। इसके अलावा, वेतन मिलने में देरी के कारण पीएफ भी महीनों लेट जमा हुआ, जिससे शिक्षकों को भारी ब्याज का नुकसान उठाना पड़ा।
सालों पुराना पीएफ बकाया: कई शिक्षक जो वर्षों पहले नियुक्त हुए थे, उन्हें लंबे समय तक पीएफ कवरेज ही नहीं दिया गया।
नियमानुसार 20 या उससे अधिक कर्मचारी होने पर पीएफ अनिवार्य है, लेकिन आरोप है कि कॉलेज ने लंबे समय तक कई कर्मचारियों को इससे वंचित रखा।
आगे की कार्रवाई की चेतावनी
ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर कॉलेज प्रबंधन ने पूरा रिकॉर्ड, भुगतान के पुख्ता सबूत और स्पष्टीकरण पेश नहीं किया, तो ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020’ के तहत भारी जुर्माना, ब्याज सहित रिकवरी और अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।
इस गंभीर खुलासे के बाद कॉलेज के शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है। शिक्षकों का कहना है कि यह उनके बुढ़ापे की एकमात्र सुरक्षित जमा-पूंजी है, जिसके साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वहीं, इस संबंध में प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता (भट्टे वालों) का पक्ष सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि पीएफ जमा करने में कुछ देरी जरूर हुई थी, लेकिन सभी का पीएफ जमा कर दिया गया है।
