मेरठ (शिखर समाचार)। मेरठ परिक्षेत्र में लंबित आपराधिक विवेचनाओं के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण को लेकर पुलिस उपमहानिरीक्षक कलानिधि नैथानी ने समीक्षा करते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर शिकंजा कसा है। ‘ऑपरेशन विवेचना’ के तहत की गई समीक्षा में मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ के विभिन्न सर्किलों में लंबित विवेचनाओं की स्थिति का आकलन किया गया। विवेचनाओं की संख्या में 10 प्रतिशत या उससे अधिक वृद्धि मिलने पर छह क्षेत्राधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
पांच सर्किलों में लंबित विवेचनाएं घटीं, प्रदर्शन सराहनीय
सीसीटीएनएस पोर्टल पर 1 अक्टूबर और 15 अक्टूबर 2026 को प्रदर्शित लंबित विवेचनाओं की तुलनात्मक समीक्षा में मेरठ के कोतवाली और दौराला सर्किल, बुलंदशहर के डिबाई और सिकंदराबाद सर्किल तथा बागपत के नगर सर्किल का प्रदर्शन सराहनीय रहा। मेरठ के कोतवाली सर्किल में लंबित विवेचनाएं 296 से घटकर 256 रह गईं, जबकि दौराला में इनकी संख्या 290 से घटकर 259 हो गई। बुलंदशहर के डिबाई में लंबित विवेचनाएं 145 से घटकर 127 और सिकंदराबाद में 283 से घटकर 269 रह गईं। बागपत के नगर सर्किल में संख्या 221 से घटकर 210 हो गई।
लंबित विवेचनाएं बढ़ने पर छह क्षेत्राधिकारियों से जवाब तलब
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दूसरी ओर, मेरठ के ब्रह्मपुरी सर्किल में लंबित विवेचनाएं 239 से बढ़कर 264 और सदर देहात में 276 से बढ़कर 307 हो गईं। बुलंदशहर के अनूपशहर में यह संख्या 148 से बढ़कर 175, शिकारपुर में 133 से बढ़कर 156 तथा स्याना में 132 से बढ़कर 146 हो गई। हापुड़ के पिलखुवा सर्किल में लंबित विवेचनाएं 175 से बढ़कर 195 पहुंच गईं। इन सर्किलों में वृद्धि को गंभीरता से लेते हुए संबंधित क्षेत्राधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने कहा कि परिक्षेत्र में निरीक्षक और उपनिरीक्षक पर्याप्त संख्या में तैनात होने के बावजूद कुछ सर्किलों में विवेचनाओं का संतोषजनक निस्तारण नहीं हुआ है। इसके लिए क्षेत्राधिकारियों को अपने क्षेत्रों में प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने जनपद प्रभारियों को लंबित विवेचनाओं और वांछित अपराधियों की नियमित समीक्षा करने, अधीनस्थों को लक्ष्य निर्धारित कर कार्य सौंपने, अपराधियों की गिरफ्तारी तेज करने तथा लंबित मामलों का शीघ्र विधिक निस्तारण कराने के निर्देश दिए।
