ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)। जनपद गौतम बुद्ध नगर में औद्योगिक सामंजस्य और शांति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए न्यूनतम वेतन में अंतरिम बढ़ोतरी की घोषणा की है। योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह जानकारी साझा की।
श्रमिकों के वेतन में 21% तक वृद्धि
औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि श्रमिकों की मांगों और वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। इस निर्णय के तहत गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अधिकतम 21 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि की गई है, जिसमें सबसे अधिक लाभ कुशल श्रमिकों को मिला है। नई वेतन दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी।
गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में संशोधित वेतन के अनुसार अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रमिकों के वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।
अन्य जिलों के लिए भी नई वेतन दरें निर्धारित
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अन्य नगर निगम क्षेत्रों और जिलों के लिए भी नई वेतन संरचना तय की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है और आगामी समय में वेतन निर्धारण बोर्ड के गठन के बाद स्थायी न्यूनतम वेतन तय किया जाएगा। साथ ही श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य, पेंशन और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
समिति ने स्पष्ट किया कि 20,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन लागू होने की खबरें पूरी तरह भ्रामक और निराधार हैं। साथ ही बताया गया कि भारत सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर आधार वेतन तय करने की प्रक्रिया जारी है।
श्रमिकों और नियोक्ताओं के साथ वार्ता
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श्रमिक प्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ वेतन वृद्धि, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान और सुरक्षित कार्य वातावरण जैसी मांगें रखीं। वहीं नियोक्ताओं ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच इन मांगों को विचारणीय बताया।
जनपद स्तर पर श्रमिक समस्याओं के समाधान के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। प्रशासन ने कहा है कि औद्योगिक सौहार्द बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और तकनीकी निगरानी व खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।
नियंत्रण कक्ष और सख्त कार्रवाई के निर्देश
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बैठक में डॉ. एम. के. एस. सुंदरम, आलोक कुमार, मार्कण्डेय शाही, राकेश कुमार सिंह तथा मेधा रूपम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदेश सरकार ने दोहराया कि औद्योगिक शांति, श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और निवेश के अनुकूल वातावरण बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
