हरिद्वार (शिखर समाचार)। उत्तरांचल पंजाबी महासभा की ओर से प्रेम नगर आश्रम में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और विभाजन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों को नमन किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का पगड़ी पहनाकर और त्रिशूल भेंट कर स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन केवल देश की भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों की साझा विरासत, संस्कृति, पहचान और भावनाओं का भी विस्थापन था। लाखों परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा और असंख्य लोगों ने जान गंवाई। उन्होंने कहा कि इस दर्दनाक इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के महत्व को समझा जा सके।
सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों के संरक्षण पर जोर
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली विरासत से पुनः जुड़ रहा है। उत्तराखंड में विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आगामी कुंभ को ऐतिहासिक, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
विभाजन के दौरान सीमाओं के निर्धारण का किया उल्लेख
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कार्यक्रम में हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि विभाजन के समय भारत-पाकिस्तान की सीमाएं तत्काल स्पष्ट नहीं थीं और सर सिरिल रेडक्लिफ को सीमा निर्धारण की जिम्मेदारी दी गई थी। इस अवसर पर मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा सहित अन्य लोगों ने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने रक्तदान करने वालों को प्रशस्ति पत्र दिए तथा विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विभिन्न जनपदों से आए पंजाबी समाज के बुजुर्गों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
