गाजियाबाद (शिखर समाचार)। आईएमएस गाजियाबाद की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा साईं उपवन, न्यू बस स्टैंड के समीप वृक्षारोपण अभियान और स्वच्छता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम हिंडन नदी के तट पर स्थित साईं उपवन में संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में हरियाली बढ़ाना और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ करना रहा। इस दौरान लगभग 200 पौधों का रोपण किया गया, जिससे न केवल हरित आवरण में वृद्धि होगी बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलेगी। यह पहल वर्तमान समय की गंभीर चुनौती पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय प्रयास के रूप में सामने आई।
कार्यक्रम का आयोजन साक्षमभूमि फाउंडेशन, यमुना टास्क फोर्स, संभवी तथा गाज़ियाबाद नगर निगम के सहयोग से किया गया। विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता ने यह सिद्ध किया कि जब समाज के अलग अलग वर्ग एक साथ आते हैं तो सकारात्मक और सार्थक परिवर्तन संभव हो जाता है। इस अवसर पर साक्षमभूमि फाउंडेशन के पर्यावरणविद् मोहित रेलहन और राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी ऋषि कुमार सिंह सहित अन्य सदस्यों ने पर्यावरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने नदी तट पर स्वच्छता अभियान चलाते हुए कचरा हटाकर क्षेत्र को साफ-सुथरा बनाया।
200 पौधों का रोपण, देशी प्रजातियों पर जोर
वृक्षारोपण के दौरान जैविक तकनीकों से तैयार प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग किया गया। लगाए गए पौधों में नीम, बरगद, सागौन, शीशम, कनेर, आंवला, जामुन और रबर जैसी देशी प्रजातियों को शामिल किया गया। मोहित रेलहन ने अपने संबोधन में सतत विकास के महत्व पर बल देते हुए सभी से प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने हिंडन नदी को प्रदूषण मुक्त रखने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशेषज्ञों ने सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर
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इस अवसर पर संस्थान की निदेशक प्रो. (डॉ.) जसकिरण कौर ने कहा कि प्रकृति के संरक्षण में ही मानवता का भविष्य सुरक्षित है और प्रत्येक व्यक्ति का छोटा प्रयास भी पर्यावरण बचाने की दिशा में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने और समाज में जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया गया।
