आरव शर्मा
भोपाल (शिखर समाचार)।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित पंडित माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान में मीडिया और अकादमिक जगत के बीच गहन संवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए वक्ताओं ने वर्तमान पत्रकारिता की दिशा और दशा पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया।
पत्रकारिता के मूल्यों में आया बदलाव
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार, संपादक एवं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि स्वतंत्रता पूर्व और वर्तमान पत्रकारिता के मूल्यों में व्यापक परिवर्तन आया है। जहां पहले पत्रकारिता लोकहित, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से प्रेरित थी, वहीं आज इसमें व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं अधिक हावी होती दिखाई दे रही हैं।
अच्युतानंद मिश्र ने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें केवल पत्रकार नहीं, बल्कि एक तेजस्वी योद्धा, संत और समाज के पथप्रदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि चतुर्वेदी ने अपनी लेखनी से देश की राजनीति, साहित्य, संस्कृति और सभ्यता को नई ऊंचाई दी। उनका प्रभाव इतना व्यापक था कि उस समय का लगभग हर बड़ा नेता, साहित्यकार और पत्रकार उनसे मिलने उनके गांव बावाई और कर्मस्थली खंडवा पहुंचता था।
महान विभूतियों से प्रेरणा लेने का आह्वान
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उन्होंने माधवराव सप्रे, महावीर प्रसाद द्विवेदी और ‘कल्याण’ पत्रिका के संपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से उनके जीवन और कार्यों का अध्ययन करने का आह्वान किया। ‘पुष्प की अभिलाषा’ कविता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह रचना आज भी इसलिए कालजयी है क्योंकि यह देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना से उत्पन्न हुई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ‘कल्याण’ पत्रिका आज भी बिना विज्ञापन और पुस्तक समीक्षा के प्रकाशित होती है, जो पत्रकारिता के आदर्श स्वरूप का उदाहरण है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात लेखक एवं विचारक मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी ने पत्रकारिता को एक विद्या के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जिस समय पत्रकारिता को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था, उस समय चतुर्वेदी ने उसे ज्ञान और मर्यादा का माध्यम माना। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारिता के क्षेत्र में संस्थागत साहस अत्यंत आवश्यक है। मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि जब शब्द सत्य से उत्पन्न होते हैं, तो उनका प्रभाव किसी भी तोप से अधिक होता है। उन्होंने चतुर्वेदी के संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वे जब-जब जेल से लौटे, और अधिक सशक्त और प्रखर होकर सामने आए, जैसे तपकर सोना और अधिक निखर जाता है।
कार्यक्रम में विविध गतिविधियां आयोजित
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कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने स्वागत भाषण देते हुए अच्युतानंद मिश्र के योगदान को स्मरण किया और कहा कि विश्वविद्यालय की वर्तमान उपलब्धियों की आधारशिला उनके प्रयासों से रखी गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस समृद्ध परंपरा को आगे भी संरक्षित और विकसित किया जाएगा। इस अवसर पर पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों द्वारा तैयार विकल्प समाचार पत्र का विमोचन किया गया। साथ ही, निगमित सामाजिक दायित्व के अंतर्गत एमपी ऑनलाइन द्वारा विश्वविद्यालय को एक विद्युत चालित रिक्शा भेंट किया गया, जिसका शुभारंभ अतिथियों ने किया।
कार्यक्रम का संचालन संस्कृतिकर्मी विनय उपाध्याय ने किया, जबकि आभार कुलसचिव पी. शशिकला ने व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, विद्यार्थी, कर्मचारी तथा शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
