आरव शर्मा
हापुड़ (शिखर समाचार)।
पिलखुवा क्षेत्र स्थित नेशनल हाईवे 9 पर सरस्वती मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने चार वर्षीय बच्ची मानवी का अत्यंत दुर्लभ एवं जटिल जन्मजात रोग द्विपक्षीय ब्रांचियल फिस्टुला का सफल ऑपरेशन कर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। यह बीमारी अत्यंत कम मामलों में पाई जाती है और इसकी सर्जरी को काफी जटिल माना जाता है।
दुर्लभ बीमारी और जटिल सर्जरी
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विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश कुमार के नेतृत्व में डॉ. शुभम मित्तल, डॉ. नंदिनी और डॉ. थजाना की टीम ने बताया कि इस रोग में गर्दन के दोनों ओर असामान्य नलिकाएं विकसित हो जाती हैं, जो त्वचा और आंतरिक संरचनाओं के बीच संपर्क बनाती हैं। इसके कारण बार-बार संक्रमण, पस का स्राव और सूजन जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह गंभीर जटिलताओं का रूप ले सकता है।
विशेषज्ञ टीम ने निभाई अहम भूमिका
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चिकित्सकों के अनुसार, इस प्रकार के मामलों में सटीक निदान और सर्जरी के दौरान फिस्टुला पथ का पूर्ण निष्कासन अत्यंत आवश्यक होता है, अन्यथा बीमारी दोबारा हो सकती है। अनुभवी ईएनटी सर्जिकल टीम ने अत्याधुनिक तकनीकों और कुशलता के साथ ऑपरेशन को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिससे पुनरावृत्ति की संभावना समाप्त हो गई।
सर्जरी के बाद तेजी से सुधार
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सर्जरी के बाद बच्ची की स्थिति स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही है। इस सफलता पर संस्थान की प्राचार्या डॉ. बरखा गुप्ता, वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर डॉ. आर.के. सहगल, महाप्रबंधक एन. वर्धराजन, निदेशक रघुवर दत्त एवं चिकित्सा अधीक्षक मेजर जनरल डॉ. सी.एस. आहलूवालिया सहित संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पूरी टीम को बधाई दी। वहीं संस्थान के संस्थापक डॉ. जे. रामचंद्रन और उपाध्यक्ष रम्या रामचंद्रन ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया।
