ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)।
जनपद Gautam Buddh Nagar में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण किया गया। 14 मार्च को जनपद न्यायालय के सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर जिला जज Atul Srivastava सहित सभी न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन और संचालन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव Shivani Tyagi ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में जनपद न्यायालय गौतमबुद्धनगर के साथ-साथ तहसील स्तर पर भी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह आयोजन जिला जज अतुल श्रीवास्तव के निर्देशन में संपन्न हुआ।
लोक अदालत के दौरान जनपद न्यायालय के विभिन्न न्यायिक अधिकारियों द्वारा कुल 2,27,807 मामलों का निस्तारण किया गया। प्री-लिटिगेशन स्तर पर विभिन्न विभागों द्वारा भी बड़ी संख्या में मामलों का समाधान कराया गया।
विभागवार और न्यायालयवार निस्तारण
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- राजस्व न्यायालयों: 1,02,745
- बैंकों में: 280
- एनपीसीएल: 107
- यूपीपीसीएल: 5,678
- श्रम न्यायालय: 1,013
- पुलिस विभाग: 18,478
- बीएसएनएल: 21
- चिकित्सा विभाग: 72,733
- यातायात विभाग: 4,61,213
इस प्रकार प्री-लिटिगेशन स्तर पर कुल 6,98,473 मामलों का समाधान हुआ।
न्यायालयवार निस्तारण में वाणिज्य न्यायालय, परिवार न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, विभिन्न अपर जिला जज न्यायालय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, सिविल जज न्यायालय तथा एनआई एक्ट से संबंधित न्यायालयों में बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा हुआ। कई मामलों में आपसी समझौते के माध्यम से लाखों-करोड़ों रुपये की धनराशि का निस्तारण किया गया।
नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा 5,500 और यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा 305 मामलों का समाधान किया गया। जिला प्रशासन, अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी और तहसील स्तर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 1,02,745 राजस्व मामलों का निस्तारण हुआ।
कुल निस्तारण और उद्देश्य
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इस प्रकार राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 9,26,280 मामलों का निस्तारण किया गया। विभिन्न मामलों में समझौते और जुर्माने के रूप में लगभग 8,52,99,99,900 रुपये की धनराशि का निपटारा हुआ।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को सुलभ, त्वरित और सस्ती न्याय व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिससे लंबित मामलों का शीघ्र समाधान हो सके और न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम हो।
