गाजियाबाद (शिखर समाचार)। IMS Ghaziabad (University Courses Campus) में Indian Council of Social Science Research (आईसीएसएसआर) द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय सातवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन हुआ। सम्मेलन का विषय “टेक्नोलॉजी ड्रिवेन इनोवेशन एंड सस्टेनेबल बिज़नेस प्रैक्टिसेज” रहा। यह सम्मेलन सीए (डॉ.) राकेश छारिया, महासचिव, आईएमएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की अध्यक्षता तथा संस्थान की निदेशक प्रो.(डॉ.) जसकिरण कौर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। दो दिनों तक चले इस अकादमिक आयोजन ने शोध, नवाचार और उद्योग-शिक्षा समन्वय के क्षेत्र में सार्थक संवाद स्थापित किया।
समापन सत्र में विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
समापन दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में अभिनव गोपाल, चीफ डेवलपमेंट अफसर, गाजियाबाद उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में मंजू रावत (कॉर्पोरेट ट्रेनर एवं ऑथर), प्रो.(डॉ.) एहतिराम रज़ा, सीनियर एकेडमिशियन, Jamia Hamdard तथा प्रो.(डॉ.) उमेश कुमार, यूआईई, Chandigarh University शामिल रहे।
अतिथियों ने तकनीक आधारित नवाचार को सतत विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए युवा शोधार्थियों को शोध के माध्यम से समाज और उद्योग की वास्तविक समस्याओं के समाधान हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में शोध केवल प्रकाशन तक सीमित न रहकर सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनना चाहिए।
एसडीजी मैपिंग और वैश्विक सहभागिता
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सम्मेलन के अंतिम दिन “एसडीजी मैपिंग फॉर टेक प्रोजेक्ट्स” विषय पर विशेष पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया। इसमें प्रो.(डॉ.) संदीप पोद्दार, डीवीसी आर एंड आई, Lincoln University College, प्रो. फान बाओ जियांग, वाइस प्रेसिडेंट एवं डीन, यूईएफ, वियतनाम, डॉ. बुद्धा चंद्रशेखर, हितेश गुलाटी (चेंज मैनेजमेंट कंसलटेंट), कुशल शर्मा (डिवीजन हेड) तथा डॉ. मनप्रीत सिंह मन्ना मुख्य पैनलिस्ट के रूप में शामिल रहे। पैनलिस्ट्स ने तकनीकी परियोजनाओं को सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ने की रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए और नवाचार को सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
सम्मेलन में देश-विदेश से मैनेजमेंट, पत्रकारिता, कंप्यूटर साइंस, एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन तथा साइंस के क्षेत्रों से शोध पत्र आमंत्रित किए गए थे। सम्मेलन को पाँच प्रमुख ट्रैक्स—एआई एंड डेटा ड्रिवेन डिसीजन मेकिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी एंड रिस्पॉन्सिबल टेक लीडरशिप, सस्टेनेबल बिज़नेस एंड सोशल इम्पैक्ट तथा इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोचेस—में विभाजित किया गया। दूसरे दिन 350 से अधिक शिक्षकों और शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए नवीन शोध निष्कर्ष साझा किए। देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों की इसमें उल्लेखनीय सहभागिता रही।
बेस्ट पेपर अवार्ड और समापन
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प्रत्येक ट्रैक में प्रस्तुत शोध पत्रों का मूल्यांकन एक्सटर्नल और इंटरनल सेशन चेयर द्वारा किया गया। छात्र श्रेणी में नेशनल इकोनॉमिक यूनिवर्सिटी, वियतनाम की छात्रा फाम थी नहट लीन्ह को बेस्ट पेपर अवार्ड मिला। पीएचडी स्कॉलर श्रेणी में बेस्ट पेपर अवार्ड एपीजे सत्य यूनिवर्सिटी, हरियाणा की मिशिका को प्राप्त हुआ। फैकल्टी श्रेणी में बेस्ट पेपर अवार्ड सेंट मैरी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, हैदराबाद से डॉ. सिरा गोवेर्धन को मिला, जबकि रिसर्च एसोसिएट श्रेणी में बेस्ट पेपर अवार्ड सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस, नई दिल्ली की शिफाली गोयल को प्रदान किया गया।
निदेशक प्रो.(डॉ.) जसकिरण कौर ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक केवल उपकरण नहीं, बल्कि परिवर्तन का माध्यम है। जब नवाचार को नैतिक मूल्यों और सतत विकास के दृष्टिकोण से जोड़ा जाता है, तभी वास्तविक प्रगति संभव होती है। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य छात्रों और शोधार्थियों को ऐसा मंच प्रदान करना है, जहाँ वे वैश्विक चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत कर सकें और शोध में गुणवत्ता तथा सामाजिक प्रतिबद्धता बनाए रखें। कार्यक्रम का संचालन डॉ. येर्रगोला प्रकाश ने किया। दो दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अकादमिक उत्कृष्टता, शोध नवाचार और उद्योग-शिक्षा समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल के रूप में संपन्न हुआ।

