यमुना एक्सप्रेसवे पर 400 करोड़ का हाइपरस्केल डेटा सेंटर, डिजिटल हब बनेगा क्षेत्र

Rashtriya Shikhar
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A ₹400 crore hyperscale data center will be developed along the Yamuna Expressway, turning the region into a major digital hub. IMAGE CREDIT TO AUTHORITY

ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)। उत्तर भारत में डिजिटल अवसंरचना को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बी.के. सेल्स कॉर्पोरेशन ने यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में अत्याधुनिक हाइपरस्केल डेटा सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है। करीब 400 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाली इस परियोजना का नेतृत्व California Institute of Technology के पूर्व छात्र करण गुप्ता करेंगे।

यमुना एक्सप्रेसवे पर 7000 रैक क्षमता वाला हाइपरस्केल डेटा सेंटर

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परियोजना के तहत Yamuna Expressway Industrial Development Authority (यीडा) के सेक्टर में पांच एकड़ के प्राइम भूखंड पर दो अत्याधुनिक डेटा सेंटर भवन विकसित किए जाएंगे। प्रस्तावित परियोजना की क्षमता लगभग 7000 सर्वर रैक की होगी, जो उच्च घनत्व डिजिटल संचालन और तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सेगमेंट को सपोर्ट करेगी।

यह डेटा सेंटर व्यवसायों, सरकारी संस्थानों और डिजिटल उद्यमों को उन्नत डिजिटल अवसंरचना उपलब्ध कराएगा, जिससे क्षेत्र की डेटा इकोसिस्टम को नई मजबूती मिलेगी।

400 करोड़ निवेश, रोजगार और हरित ऊर्जा पर जोर

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परियोजना में दो चरणों में करीब 400 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। पूर्ण संचालन शुरू होने पर लगभग 100 योग्य पेशेवरों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। भूमि हस्तांतरण के 18 माह के भीतर व्यावसायिक संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

डेटा सेंटर परियोजना में हरित ऊर्जा और उन्नत तकनीक पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा समाधान, उच्च दक्षता वाली कूलिंग तकनीक और ऊर्जा-कुशल पावर सिस्टम का उपयोग किया जाएगा, जिससे बिजली खपत कम होगी और कार्बन फुटप्रिंट घटाने में मदद मिलेगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की निकटता से मिलेगा लाभ

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Noida International Airport की निकटता के कारण परियोजना को अबाधित विद्युत आपूर्ति और विकसित फाइबर नेटवर्क का लाभ मिलेगा।

गुरुवार को यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश सिंह ने बी.के. सेल्स कॉर्पोरेशन को डेटा सेंटर स्थापना के लिए पांच एकड़ भूमि आवंटन का एलओआई सौंपा। इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेन्द्र कुमार भाटिया (आईएएस) भी उपस्थित रहे।यह परियोजना उत्तर भारत को डेटा और डिजिटल नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

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