गाजियाबाद (शिखर समाचार)।
अपराधों की विवेचना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड़ ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने सभी थानों में कार्यरत विवेचना अधिकारियों को अत्याधुनिक टैबलेट उपलब्ध कराए हैं, जिससे पुलिसिंग को तकनीक से जोड़ते हुए स्मार्ट पुलिसिंग को मजबूती प्रदान हो सके और जांच प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाया जा सके।
932 विवेचकों को वितरित किए गए टैबलेट
विभिन्न थानों पर नियुक्त 932 विवेचकों को टैबलेट वितरित किए गए। इन उपकरणों की मदद से विवेचक घटनास्थल से ही महत्वपूर्ण सूचनाएं, साक्ष्य, दस्तावेज और अन्य आवश्यक जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज कर सकेंगे। इससे न केवल जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि मामलों के निस्तारण में भी तेजी आएगी।

डिजिटल तकनीक से होगी जांच प्रक्रिया और प्रभावी
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डिजिटल तकनीक के उपयोग से कागजी कार्यवाही में उल्लेखनीय कमी आएगी। वर्तमान समय में कई मामलों में दस्तावेजों के संकलन और रिकॉर्ड के रखरखाव में काफी समय खर्च होता है। टैबलेट के माध्यम से यह प्रक्रिया सरल और तेज होगी, जिससे विवेचक अधिक समय जांच और अपराध नियंत्रण पर केंद्रित कर सकेंगे।
यह पहल भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साक्ष्यों और दस्तावेजों का बेहतर प्रबंधन होने से न्यायिक प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी।

स्मार्ट पुलिसिंग को मिलेगा बढ़ावा
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इस तकनीकी बदलाव से लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण में सहायता मिलेगी। साथ ही पुलिसिंग अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनेगी। विवेचना की प्रत्येक प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से निगरानी और समीक्षा भी आसान हो जाएगी।
यह कदम प्रदेश में तकनीक आधारित पुलिसिंग के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। आधुनिक तकनीक का उपयोग अपराध नियंत्रण और जांच प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में गाजियाबाद पुलिस की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती है।
