स्वदेशी एलईडी लड़ियों और मिलेट्स के गिफ्ट हैंपर से रोशन हुई महिलाओं की दिवाली, 18 लाख से अधिक का कारोबार

Rashtriya Shikhar
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Women’s Diwali Illuminated with Swadeshi LED Lights and Millet Gift Hampers, Generating Business Worth Over ₹18 Lakh. IMAGE CREDIT TO: सूचना विभाग

देहरादून (शिखर समाचार)। दीपावली के त्योहार पर देहरादून की ग्रामीण महिलाओं ने स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय संसाधनों के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं जहां स्वदेशी एलईडी लड़ियां तैयार कर घरों को रोशन कर रही हैं, वहीं पहाड़ी मिलेट्स से बने आकर्षक गिफ्ट हैंपर के माध्यम से बाजार में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। दोनों महिला क्लस्टरों ने दीपावली के अवसर पर लाखों रुपये का कारोबार कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता को मजबूती दी है।

विकासनगर विकासखंड के ग्राम सोरना डोभरी स्थित स्वाभिमान महिला क्लस्टर की महिलाएं मिलेट्स से तैयार विभिन्न खाद्य उत्पादों के गिफ्ट हैंपर बना रही हैं। इनमें हाथ से तैयार कुकीज, रागी हनी बिस्किट, फ्रूट एंड नट्स चॉकलेट, गुड़ मिल्क बिस्किट, रागी चॉकलेट, मंडुआ केक और मंडुआ चॉकलेट शामिल हैं। इन उत्पादों की मांग देहरादून के अलावा उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल तक पहुंच रही है। क्लस्टर की सदस्य कल्पना बिष्ट के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना से जुड़कर बेकरी इकाई स्थापित की गई थी। इस दीपावली पर विभिन्न बड़े संस्थानों से मिले ऑर्डर के तहत अब तक 2,000 से अधिक गिफ्ट हैंपर बेचकर 18 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की जा चुकी है। इस इकाई में गांव की आठ अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।

350 महिलाएं तैयार कर रहीं स्वदेशी एलईडी लड़ियां, मिला 1.30 लाख का ऑर्डर

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दूसरी ओर, रायपुर विकासखंड के सोडा सरोली ग्रोथ सेंटर में दिव्य ज्योति क्लस्टर की महिलाएं मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के अंतर्गत स्वदेशी हिलान्स एलईडी लड़ियों का निर्माण कर रही हैं। क्लस्टर को कुल 1.30 लाख लड़ियां तैयार करने का ऑर्डर मिला है। सोडा सरोली और थानों न्याय पंचायत के करीब 350 महिलाएं घरों पर ही इनका निर्माण कर रही हैं। क्लस्टर अध्यक्ष ममता कोठियाल ने बताया कि अब तक 1.05 लाख लड़ियों की आपूर्ति पूरी हो चुकी है और शेष 25 हजार का निर्माण जारी है। बाजार में इनकी कीमत करीब 120 रुपये प्रति पैकेट है, जबकि लागत 70 से 80 रुपये आती है। प्रत्येक महिला को 100 पैकेट तैयार करने पर लगभग 700 रुपये की आय हो रही है।

स्वदेशी उत्पादों से महिलाओं को मिल रहे रोजगार के नए अवसर

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सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि दोनों क्लस्टरों की महिलाएं त्योहार के दौरान आजीविका संवर्धन के कार्यों में जुटी हैं। स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग से महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। यह पहल स्वदेशी को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।

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