ब्रह्मज्ञान से ही होगी रामराज्य की परिकल्पना साकार : डॉ. सर्वेश्वर

Rashtriya Shikhar
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The idea of “Ram Rajya” can be realized only through spiritual knowledge (Brahma Gyaan), said Dr. Sarveshwar. IMAGE CREDIT TO दिव्य ज्योति जागृती संस्थान

हापुड़ (शिखर समाचार)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अर्जुन नगर के सामने वाले ग्राउंड, स्वर्ग आश्रम रोड, हापुड़ में आयोजित श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस पर कथा पंडाल में दीपावली पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों पर नृत्य कर आनंद उत्सव मनाया।

रावण वध प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन

गुरुदेव आशुतोष महाराज के शिष्य कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर ने रावण वध प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जब रावण ने विभीषण को भरी सभा में अपमानित कर लात मारी, तब विभीषण श्रीराम की शरण में पहुंच गए। उन्होंने कहा कि राजनीति भले ही शत्रु के भाई पर विश्वास न करने की सीख देती हो, लेकिन भगवान श्रीराम ने करुणा, प्रेम और निष्काम भाव का परिचय देते हुए विभीषण को न केवल अपनाया, बल्कि युद्ध से पहले ही उन्हें लंका का राजा घोषित कर दिया।

गिलहरी का प्रसंग और सेवा का संदेश

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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने केवल विभीषण ही नहीं, बल्कि उस छोटी गिलहरी के भावों को भी स्वीकार किया, जो समुद्र पर सेतु निर्माण में रेत डालकर अपनी सेवा दे रही थी। यह प्रसंग प्रेम, सौहार्द, भाईचारे और सद्भावना की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करता है, जो रामराज्य की नींव हैं।

डॉ. सर्वेश्वर ने कहा कि रामभक्त होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह प्राणीमात्र से निस्वार्थ प्रेम करना सीखे और निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर ‘मैं’ से ‘हम’ तक का सफर तय करे। उन्होंने कहा कि सच्चा भक्त दूसरों के दुख को देखकर अपने छोटे-छोटे स्वार्थों का त्याग करने में देर नहीं लगाता। उसके लिए सबसे श्रेष्ठ आसन ‘आश्वासन’, सबसे उत्तम योग ‘सहयोग’ और सबसे लंबी श्वास ‘विश्वास’ है, जो वह पीड़ित और निराश लोगों को प्रदान करता है।

ब्रह्मज्ञान से रामराज्य की परिकल्पना

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उन्होंने कहा कि यदि रामराज्य की स्थापना करनी है तो प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर दया, प्रेम, त्याग और करुणा जैसे गुण विकसित करने होंगे। यह तभी संभव है जब ब्रह्मज्ञान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर भगवान का साक्षात्कार करे। जब मनुष्य अपने अंतर्मन में ईश्वर को अनुभव करता है तो वह मन और बुद्धि के सभी भेदभावों से ऊपर उठकर समाज निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि अंतर्मन में ब्रह्मज्ञान का दीप जलते ही ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ का अंधकार स्वतः समाप्त होने लगता है और पूरी सृष्टि प्रेम व आनंद के दीपोत्सव में बदल जाती है।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति और समापन

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कार्यक्रम में संस्थान की ओर से स्वामी गोपालानंद, साध्वी श्वेता भारती, साध्वी वसुधा भारती, दीपक अग्रवाल, नीरू अग्रवाल, सुधांशु महेश्वरी, प्रीति महेश्वरी, अरुण अग्रवाल, रचना अग्रवाल, अशोक छारिया और साधना छारिया सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

संस्थान की ओर से बताया गया कि गुरुदेव आशुतोष महाराज समाज में ब्रह्मज्ञान के माध्यम से शांति, प्रेम, एकता और सद्भावना का संदेश दे रहे हैं। कार्यक्रम का समापन प्रभु की आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

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