मालन नदी के अस्तित्व पर संकट, अतिक्रमण मामले में एनजीटी ने अधिकारियों को लगाई फटकार

Rashtriya Shikhar
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Malin River Faces an Existential Threat; NGT Reprimands Officials Over Encroachment Case IMAGE CREDIT TO रिपोर्टर

बिजनौर (शिखर समाचार)। उत्तराखंड से निकलकर उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने वाली ऐतिहासिक एवं पौराणिक मालन नदी नजीबाबाद क्षेत्र में कथित अतिक्रमण और अवैध खनन के कारण अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। नदी के डूब क्षेत्र और किनारों पर कथित रूप से बसी कॉलोनियों को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अदब सिटी, अबू कॉलोनी, तागरा कॉलोनी तथा पूर्व चेयरमैन के बारात घर सहित कई निर्माण नदी क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

एनजीटी में पहुंचा मामला, आईआईटी रुड़की को सर्वे की जिम्मेदारी

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नजीबाबाद निवासी संदीप कुमार वर्मा ने अतिक्रमण और नदी के कथित अवैध दोहन को लेकर शासन-प्रशासन को कई शिकायतें भेजीं। कार्रवाई न होने पर उन्होंने वर्ष 2025 में मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष उठाया। मामले की सुनवाई के दौरान अधिकरण ने नदी का सर्वे कराने तथा संयुक्त समिति के माध्यम से अतिक्रमण चिह्नित करने के निर्देश दिए। इसके लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की को सर्वे की जिम्मेदारी दिए जाने और करीब 40 लाख रुपये शुल्क निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

12 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश

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हाल में हुई सुनवाई के दौरान अधिकरण ने संबंधित पांच विभागों के अधिकारियों से जवाब मांगा। अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने और अतिरिक्त समय मांगने पर अधिकरण ने सख्त रुख अपनाते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति की चेतावनी दी। सुनवाई में उत्तर प्रदेश के शहरी विकास विभाग से संबंधित विषय सामने आने के बाद सचिव, उत्तर प्रदेश शहरी विकास को 12 अक्टूबर 2026 तक स्पष्ट जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है। अब निगाहें आगामी सुनवाई और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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