गाजियाबाद (शिखर समाचार)।
आगामी कांवड़ यात्रा और मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण रूप से संपन्न कराने के लिए गाजियाबाद पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। तैयारियों को लेकर एडिशनल सीपी राजकरन नैय्यर की अध्यक्षता में रिजर्व पुलिस लाइन्स स्थित परमजीत हॉल में समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया। बैठक में सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर विस्तृत समीक्षा
बैठक में डीसीपी नगर/ट्रांस हिंडन धवल जायसवाल, डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्रनाथ तिवारी, डीसीपी यातायात त्रिगुण बिसेन और सर्किलों के सहायक पुलिस व थाना प्रभारी मौजूद रहे। अधिकारियों के साथ क्षेत्रवार तैयारियों की समीक्षा करते हुए एडिशनल सीपी ने कहा कि कांवड़ यात्रा और मोहर्रम दोनों ही बड़े आयोजन हैं, जिनमें लाखों लोगों की सहभागिता रहती है। ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को सुरक्षित तथा सुगम वातावरण उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता है।
कांवड़ यात्रा मार्गों और भीड़ प्रबंधन पर जोर
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गोष्ठी के दौरान कांवड़ यात्रा मार्गों की विशेष समीक्षा करने के आदेश दिए गए। सभी को निर्देशित किया गया कि अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील और अतिसंवेदनशील स्थानों का चिन्हीकरण कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करें। कांवड़ मार्गों पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना की संभावना को रोकने के लिए पूर्व से ही व्यापक तैयारी की जाए।
कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में शिवभक्त विभिन्न राज्यों और जनपदों से गाजियाबाद होकर गुजरते हैं। ऐसे में यातायात संचालन एक बड़ी चुनौती होती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रभावी डायवर्जन योजना तैयार की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और आमजन का आवागमन भी न्यूनतम रूप से प्रभावित हो।
ड्रोन निगरानी, सोशल मीडिया और साम्प्रदायिक सौहार्द पर फोकस
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प्रमुख कांवड़ मार्गों, शिविरों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग तथा नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए गए। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी निगरानी को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर भी जोर दिया गया।
सोशल मीडिया पर सतर्क निगरानी रखने और अफवाह फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही स्थानीय स्तर पर आयोजकों, धर्मगुरुओं और गणमान्य नागरिकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने तथा त्योहारों के दौरान साम्प्रदायिक सौहार्द को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।
