——मधुबन-बापूधाम में 38,340 वर्गमीटर में बनकर तैयार हुआ भव्य परिसर, अगले माह लोकार्पण की तैयारी
आरव शर्मा
गाजियाबाद (शिखर समाचार)। मधुबन-बापूधाम योजना में लगभग ₹152 करोड़ की लागत से तैयार अत्याधुनिक बुनकर मार्ट अब प्रदेशभर के शिल्पकारों और कारीगरों के लिए एक बड़ा हब बनेगा। गाजियाबाद दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परियोजना की समीक्षा के बाद इसका दायरा बढ़ाते हुए इसे ‘विश्वकर्मा एक्सपो एवं कन्वेंशन सेंटर’ के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं। अब यह परिसर केवल बुनकरों तक सीमित न रहकर प्रदेश के सभी जनपदों की हस्तकला, पारंपरिक शिल्प और ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) से जुड़े कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराएगा।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा 38,340 वर्गमीटर क्षेत्र में निर्मित इस परियोजना का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। यह केंद्र ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से करीब 6 किलोमीटर और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे दिल्ली-एनसीआर सहित अन्य राज्यों से आने वाले खरीदारों और व्यापारियों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।
परिसर में उपलब्ध आधुनिक सुविधाएं
° 560 सीटों की क्षमता वाला आधुनिक ऑडिटोरियम
° बड़े एक्सपो व कन्वेंशन हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम और प्रदर्शनी गैलरी
° ओपन बुनकर मार्ट दुकानें एवं फूड कोर्ट
° सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ओपन थिएटर
° कारीगरों के ठहरने के लिए 10 रेजिडेंस यूनिट्स
° लगभग 1,000 वाहनों के लिए विशाल पार्किंग व्यवस्था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा
“इस केंद्र का स्वरूप केवल बुनकरों तक सीमित न रखकर इसे पूरे प्रदेश के शिल्पकारों और पारंपरिक हुनरमंदों के लिए एक साझा मंच बनाया जाए। प्रदेश के हर जिले के विशिष्ट उत्पादों, खासकर ओडीओपी से जुड़े कारीगरों को यहां प्रदर्शन, बिक्री और ब्रांडिंग का समुचित अवसर मिलना चाहिए। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी, कारीगरों की आय बढ़ेगी और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की संकल्पना को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।”
जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने कहा
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“मधुबन-बापूधाम में करीब ₹152 करोड़ की लागत से तैयार इस विश्वस्तरीय परिसर का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप अब इसे ‘विश्वकर्मा एक्सपो एवं कन्वेंशन सेंटर’ के बहुउद्देशीय स्वरूप में ढाला जा रहा है। यहां लकड़ी, धातु, टेराकोटा, चिकनकारी और कालीन जैसे पारंपरिक शिल्पों के लिए अलग-अलग ब्लॉक निर्धारित किए जाएंगे। आगामी माह में मुख्यमंत्री द्वारा इसके भव्य लोकार्पण की पूरी तैयारी है।”
