—–जून में ही जनता को समर्पित करने का लक्ष्य,नई पीढ़ी को मिलेगी गौरवशाली इतिहास की झलक
आरव शर्मा
गाजियाबाद (शिखर समाचार)।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा महानगर को एक नई और भव्य सांस्कृतिक पहचान देने की तैयारी अंतिम चरण में है। भारतीय संस्कृति, प्राचीन ज्ञान परंपरा और संस्कृत भाषा के गौरवशाली इतिहास को समर्पित शहर के महत्वाकांक्षी संस्कृत दर्शन पार्क का निर्माण कार्य अब पूर्णता की ओर है। मंगलवार को जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने अभियंत्रण अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों के साथ इस महाप्रोजेक्ट का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे इसी महीने (जून 2026) के अंत तक पूरी तरह तैयार कर जनता को सौंपने के कड़े निर्देश दिए हैं।
14 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा संस्कृत दर्शन पार्क
अगस्त 2025 में जीडीए ने इस विशिष्ट परियोजना की नींव रखी थी। लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा यह पार्क गाजियाबाद के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। यह सिर्फ एक सामान्य उद्यान नहीं होगा, बल्कि भारतीय दर्शन और वैदिक ज्ञान का एक ऐसा आधुनिक केंद्र होगा, जो देश-विदेश के पर्यटकों को भी आकर्षित करेगा।
आधुनिक सुविधाओं के साथ दिखेगी भारतीय संस्कृति की झलक
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निरीक्षण के दौरान जीडीए उपाध्यक्ष ने पार्क में बन रही थीम आधारित संरचनाओं, आकर्षक लैंडस्केपिंग, पाथवे, वाटर बॉडीज और अत्याधुनिक प्रकाश व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा की। इस पार्क में वेदों, उपनिषदों, महाकाव्यों और संस्कृत के श्लोकों को बेहद कलात्मक और आधुनिक तरीके से प्रदर्शित किया जा रहा है। इसके अलावा यहाँ शानदार फाउंटेन, ओपन एयर एक्टिविटी जोन, पर्यटकों के बैठने के लिए आधुनिक व्यवस्था और सुरम्य वातावरण विकसित किया जा रहा है, जो इसे शहर का सबसे प्रमुख आकर्षण केंद्र बनाएगा।

गुणवत्ता और समयबद्धता पर जीडीए उपाध्यक्ष का जोर
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जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने इंजीनियरिंग टीम को दो टूक निर्देश दिए हैं कि निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सौंदर्यीकरण, जनसुविधाओं, हरित क्षेत्र के विकास, स्वच्छता और सुरक्षा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा है। उनका स्पष्ट विजन है कि यह पार्क गाजियाबाद की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और युवाओं को अपनी जड़ों व प्राचीन विरासत से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
परियोजना को निर्धारित समय यानी इसी महीने के भीतर सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने और आपसी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्माण कार्य में कोई तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन आती है, तो उसका तत्काल समाधान निकाला जाए ताकि शहरवासियों को जल्द से जल्द इस भव्य पार्क का लाभ मिल सके।
