गाजियाबाद (शिखर समाचार)। हिन्दी भवन परिसर लोहिया नगर गाजियाबाद में पूर्व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन राजेन्द्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में कृषि एवं सम्बद्ध विभागों के 2047 विजन डाक्यूमेन्ट तैयार किए जाने हेतु प्रगतिशील कृषकों, कृषक उत्पादन संगठन के प्रतिनिधि, पशुपालक, मत्स्य पालक, उद्यान से संबंधित कृषक, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों के साथ संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मिलेट्स (श्री अन्न) पुनरोद्धार कार्यक्रम में जनपद स्तरीय मिलेट्स मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रारम्भ करते हुए डीएम रविंद्र कुमार ने कृषि के वर्तमान परिदृष्य विषय से अवगत कराते हुए 2047 तक गाजियाबाद शहर के विस्तार होने से कृषिगत क्षेत्रफल की कमी होने एवं जनसंख्या में सतत वृद्धि के फलस्वरूप फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि हेतु अपनायी जाने वाले रणनीति, नवीन तकनीकों को ध्यान में रखकर विजन डॉक्युमेन्ट तैयार करने की आवश्यकता रहेगी। विजन डॉक्युमेन्ट हेतु कृषकों से क्यू आर कोड के माध्यम से विकसित उत्तर प्रदेश बनाने के लिए उनके सुझाव 5 अक्टूबर तक दिए जा सकते हैं। कार्यक्रम में नरेन्द्र भूषण, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं प्राविधिक शिक्षा उत्तर प्रदेश शासन ने अपने सम्बोधन में किसानों एवं कृषक उत्पादक संगठनों से प्रदेश को विकसित बनाये जाने हेतु हर कृषक के अधिकार को रेखांकित करते हुए अपील कि प्रदेश को विकसित किए जाने के संबंध में अपने सुझाव दिए गए क्यू आर कोड पर साझा करें, जिससे उक्त सुझावों के अनुसार विकसित उत्तर प्रदेश 2047 हेतु विजन डाक्युमेन्ट तैयार किया जा सके। अपर मुख्य सचिव जनपद गाजियाबाद के गन्ना उत्पादक क्षेत्र होने के कारण बायो इथेनॉल व बायो डीजल के उत्पादन पर जोर दिया। अर्थ शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति को बेहतर बनाने के सुझाव देने के लिए जनपद वासियों को आमन्त्रित किया। डा. प्रमोद कुमार कृषि विज्ञान केन्द्र मुरादनगर ने प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती के साथ-साथ माँग आधारित उत्पादन पर जोर दिया।
मत्स्य पालन से लेकर कस्टमाइज्ड कृषि उत्पादों तक
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कृषि विकास की नई राह: एफपीओ को करमुक्त करने, एग्री टूरिज्म व पशुपालन को बढ़ावा देने पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
भोजपुर मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड कृषक उत्पादक संगठन के निदेशक ललित त्यागी ने सुझाव दिया कि कृषक उत्पादक संगठन से होने वाली आय को करमुक्त किया जाये, कृषक उत्पादक संगठनों को स्थापित करने के नियमों को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के समकक्ष न रखा जाये तथा लघु एवं कुटीर उद्योग को बढ़ावा दिया जाये। कृषक उत्पादक संगठन के उत्पादों को ऑगनबाड़ी, जेल, स्कूल के मिड-डे मील एवं अन्य संस्थाओं को आपूर्ति में वरियता दी जाये, जिससे कृषक उत्पादक संगठन के सदस्यों की आय में वृद्धि हो सके। प्रांजल मिश्रा, प्रगतीशील कृषक ने प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन के साथ-साथ एग्री टूरिज्म के विकास तथा कृषि पर जोर दिया। असीम रावत, प्रगतीशील गौ-पालक ने कहा कि गौ-आधारित कृषि, कृत्रिम गर्भाधान, टेली मेडीसिन की सुविधा तथा पशुओं के लिए मोबाइल एम्बुलेन्स, प्रत्येक ग्राम पंचायत में पशु प्रयोगशाला एवं निदान केन्द्र की स्थापना करायी जाए। बढ़ते शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए आरामदायक पर्याप्त स्थान को चिन्हित किया जाए, जिससे 2047 तक पशुओं के लिए जमीन की कमी न होने पाये। डॉ. केवी प्रभु, रिटायर्ड चेयर पर्सन पीपीवीएफआरए ने बताया कि फील्ड फिनोमिक्स के माध्यम से पोधो में होने वाली रोग व व्याधि पोषक तत्वों की कमी का सेन्सर के माध्यम से शीघ्र विश्लेषण तथा निदान सम्भव है। साथ ही उन्होनें कृषकों को बीज प्रजनक बनने एवं विकसित की गयी किस्मों व प्रजातियों पर उनके अधिकारों के विषय पर जागरुक करते हुए किसानों को एकजुट हो संगठित रूप से कृषि को आगे बढ़ाने हेतु प्रोत्साहित किया।
कृषि में नवाचार और टिकाऊ समाधान की दिशा में कदम: विजन 2047 के लिए विशेषज्ञों ने दिए ठोस सुझाव
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डॉ जितेन्द्र कुमार तोमर, पूर्व कृषि निदेशक ने बताया कि उत्तर प्रदेश पूरे देश का 21 प्रतिशत खाद्यान उत्पादित करता है। वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश द्वारा 725 लाख मैट्रिक टन की पैदावार रिकार्ड की गयी, जिसमें 29 लाख मैट्रिक टन तिलहन तथा 35 लाख मैट्रिक टन दहलन की फसलों का योगदान रहा। विजन 2047 हेतु तोमर ने विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव दिये गये। जिसमें मुख्य रूप से मृदा के ऑर्गेनिक कार्बन की वृद्धि हेतु फसल अवशेषों के त्वरित डिकम्पोजिशन पर शोध पर ध्यान दिया जाये। बायो पैस्टीसाइड, माइक्रो फ्लोरा को बढ़ावा दिया जाये। राजेन्द्र तिवारी, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश ने बताया कि प्रदेश ने पिछले 9 वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इस अवधि में उत्पादकता में 45 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जो कि एक कीर्तिमान है। उन्होंने कहा कि हमारे देश का भविष्य किसानों पर निर्भर है। आज प्रदेश का किसान मात्र एक-तिहाई क्षेत्रफल से तीन गुना तक उत्पादन प्राप्त कर रहा है। कृषि को लाभकारी बनाने, पोषण युक्त खेती को बढ़ावा देने तथा खेती हेतु सामतलीकरण की आवश्यकता पर बल दिया गया। उन्होंने किसानों को नवीन तकनीकों जैसे धान की एस.आर.आई. विधि श्री अन्न की खेती को बढ़ावा देने तथा जलवायु के अनुकूल खेती अपनाने की सलाह दी। शहरी क्षेत्रों में टैरेस फार्मिंग, हाइड्रोपोनिक्स और एक्वापोनिक्स जैसी आधुनिक कृषि विधियों पर भी जोर दिया गया है। समापन सत्र में मुख्य विकास अधिकारी ने विशिष्ट अतिथियों द्वारा दिए गए निर्देशों एवं सुझावों को ध्यान में रखते हुए विजन डाक्यूमेन्ट बनाने हेतु आश्वस्त किया गया एवं सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञाप्ति करते हुए कार्यशाला का समापन किया।

