हरिद्वार (शिखर समाचार)। वित्तीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), उत्तराखंड मोहम्मद परवेज आलम ने हरिद्वार कोषागार का निरीक्षण किया। इस दौरान जिला कार्यालय सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जनपद पहुंचने पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने पुष्पगुच्छ भेंटकर महालेखाकार का स्वागत किया। बैठक में अधिकारियों ने जिले के वित्तीय मामलों और कोषागार से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी दी।
स्वीकृत मद में ही बजट खर्च करने के निर्देश
महालेखाकार ने मुख्य कोषाधिकारी को निर्देश दिए कि शासन से उपलब्ध बजट का उपयोग केवल स्वीकृत मद और निर्धारित लेखा शीर्षक के अनुरूप जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं से संबंधित प्रत्येक भुगतान वित्तीय नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। किसी विभाग को योजनाओं के संचालन अथवा वित्तीय भुगतान के लिए बैंक खाता खोलने की आवश्यकता हो तो वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार बचत खाता खोला जाए और सभी लेन-देन नियमानुसार किए जाएं।
वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
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उन्होंने कहा कि समीक्षा का उद्देश्य सरकारी वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ लेखा मिलान की प्रक्रिया को मजबूत करना और लेखांकन कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि महालेखाकार के निर्देशों और सुझावों का संबंधित अधिकारियों द्वारा पूरी तरह अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
वरिष्ठ कोषाधिकारी अजय कुमार ने कोषागार से संबंधित वित्तीय मामलों की जानकारी प्रस्तुत की। महालेखाकार कार्यालय की निरीक्षण टीम ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक कोषागार हरिद्वार के अभिलेखों का निरीक्षण भी किया। इस दौरान नगर आयुक्त नंदन कुमार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, निरीक्षण अधिकारी अविनाश रंजन, वरिष्ठ लेखाकार बृजेश कुमार, सहायक लेखा अधिकारी डॉ. दिनेश शर्मा, लेखाकार नितेश चौहान सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
