ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में शहर के विकास और जनसुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में अप्रवासी श्रमिकों के लिए आवास और छात्रावास, विद्यार्थियों के लिए सार्वजनिक पुस्तकालय, बेहतर संपर्क मार्ग, रेलवे लाइन पर पैदल पुल, आपदा प्रबंधन तथा सड़कों की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में बोर्ड अध्यक्ष दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, मुख्य कार्यपालक अधिकारी एनजी रवि कुमार सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
श्रमिकों के लिए आवास और विद्यार्थियों के लिए बनेगा पुस्तकालय
औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार की तलाश में आने वाले श्रमिकों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने के लिए पतवाड़ी और बिरौंडी गांव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवास बनाने का निर्णय लिया गया। निर्माण कार्य इसी वर्ष के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं ईकोटेक-6 और ईकोटेक-11 में तीन-तीन हजार वर्गमीटर भूमि श्रम विभाग को श्रमिक छात्रावास के लिए निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
सेक्टर अल्फा-1 में 1360 वर्गमीटर क्षेत्र में सार्वजनिक पुस्तकालय बनाने को भी मंजूरी दी गई है। तीन मंजिला पुस्तकालय में विद्यार्थियों, युवाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए पुस्तकें उपलब्ध होंगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सुविधा मिलेगी।
संपर्क मार्ग, पैदल पुल और सफाई व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
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बोर्ड ने 130 मीटर चौड़ी सड़क को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए पहले चरण में एक मूर्ति तक दो-स्तरीय सड़क बनाने को मंजूरी दी। इस पर 756.01 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके साथ ही जुनपत से पूर्वी परिधीय एक्सप्रेसवे तक करीब 12 किलोमीटर लंबी 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना को भी मंजूरी मिली है।
ग्राम रिठौरी में रेलवे लाइन पर पैदल पुल बनाया जाएगा, जिसमें सीढ़ियों, ढलान मार्ग और लिफ्ट की सुविधा होगी। आवासीय भूखंडों पर निर्माण पूरा करने के लिए आवंटियों को 30 जून 2028 तक अंतिम अवसर दिया गया है।
आपदा के समय त्वरित राहत-बचाव के लिए सेक्टर ओमीक्रॉन-1ए में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र के लिए 30 आवासीय फ्लैट निशुल्क देने का निर्णय लिया गया। वहीं वायु गुणवत्ता सुधारने और धूल-मिट्टी नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय और पूर्वी क्षेत्रों में पांच वर्ष तक यांत्रिक सड़क सफाई व्यवस्था संचालित की जाएगी।
