लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर धमकी देने वाला नागपुर से पकड़ा, पुलिस की जांच में अब भी कई सवाल!

Rashtriya Shikhar
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Man Arrested in Nagpur for Threatening in the Name of the Lawrence Bishnoi Gang; Several Questions Remain in Police Investigation! IMAGE CREDIT TO पुलिस

——-13 अक्टूबर के हेलो संदेश पर पहले इनकार, फिर दोस्त का लिया नाम, गैंग से संबंधों की जांच सबसे अहम

गाजियाबाद (शिखर समाचार)। राष्ट्रीय शिखर के समाचार संपादक आरव शर्मा को कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से व्हाट्सएप पर वॉइस नोट भेजकर जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस महाराष्ट्र के नागपुर से आरोपी को पकड़कर गाजियाबाद लाई है। आरोपी मूल रूप से अयोध्या (फैजाबाद) का रहने वाला बताया जा रहा है और महाराष्ट्र में एक कंपनी में 20 हजार रुपये महीने की नौकरी करता है। पुलिस अब उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। आरोपी ने कथित तौर पर दावा किया है कि वह शाम को अपने यार दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा था और उसी दौरान उसने वॉइस नोट भेज दिया। लेकिन क्या महज पार्टी के दौरान धमकी भरा वॉइस नोट भेजने की बात पूरे मामले का जवाब है? 13 अक्टूबर के संदेश पर आरोपी के बदलते कथित बयानों, अलग अलग वॉइस नोट की आवाज में अंतर और सिम कार्ड के पंजीकृत मालिक से जुड़े सवालों ने जांच को कई मोर्चों पर महत्वपूर्ण बना दिया है।

13 अक्टूबर के हेलो संदेश पर पहले इनकार, फिर दोस्त का नाम

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इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू 13 अक्टूबर को आरव शर्मा के व्हाट्सएप पर आए हेलो संदेश से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान जब आरोपी से इस संदेश के बारे में पूछा गया तो उसने पहले साफ इनकार करते हुए कहा कि यह संदेश उसने नहीं भेजा था। बाद में दोबारा पूछे जाने पर उसने कथित तौर पर दोस्त नाम के व्यक्ति का जिक्र किया और कहा कि संदेश दोस्त ने भेजा था मुझे इस मैसेज की जानकारी नहीं है। इसका मतलब 13 अक्टूबर को मैसेज भेजने वाला और फोन में नंबर सेव करने वाला अभियुक्त नहीं कोई और था।

आरोपी के इन कथित बयानों के बाद सवाल उठता है कि यदि उसने संदेश नहीं भेजा तो दोस्त कौन है? क्या पुलिस ने दोस्त की पहचान कर उसकी भूमिका की जांच की है? क्या 13 अक्टूबर के संदेश और बाद में आए धमकी भरे वॉइस नोट के बीच कोई संबंध है? केवल आरोपी के बयान के आधार पर किसी दूसरे व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसकी पुष्टि मोबाइल फोन, व्हाट्सएप खाते और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से होनी चाहिए।

दोस्तों के साथ पार्टी में वॉइस नोट भेजने का दावा

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आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह शाम को अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा था और उसी दौरान उसने वॉइस नोट भेज दिया। लेकिन इस दावे से कई सवाल पैदा होते हैं। क्या धमकी भरा संदेश केवल मजाक में भेजा गया था या इसके पीछे कोई दूसरा उद्देश्य था? क्या आरोपी ने किसी व्यक्ति को डराने के लिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम इस्तेमाल किया? क्या उसे इस बात का अंदाजा था कि इस संदेश को गंभीर धमकी के रूप में लिया जाएगा?

इन सवालों का जवाब आरोपी के बयान से ही नहीं, बल्कि परिस्थितिजन्य और डिजिटल साक्ष्यों से भी तलाशना होगा।

वॉइस नोट की आवाज में अंतर, फोरेंसिक जांच क्यों जरूरी?

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18 अक्टूबर को आरव शर्मा को दो धमकी भरे वॉइस नोट भेजे जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद 20 अक्टूबर को क्राइम ब्रांच की टीम ने आरव शर्मा के मोबाइल से संबंधित व्हाट्सएप खाते पर एक लिंक भेजा। बताया जा रहा है कि इसके बाद एक और वॉइस नोट आया, जिसकी आवाज 18 अक्टूबर को भेजे गए दोनों वॉइस नोट की आवाज से बिल्कुल अलग सुनाई देती है।

यदि सभी वॉइस नोट एक ही व्यक्ति ने भेजे, तो आवाज में अंतर क्यों है? क्या अलग अलग व्यक्तियों ने संदेश भेजे थे या इसके पीछे कोई तकनीकी कारण है? इसकी पुष्टि के लिए सभी मूल रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच और आवाज का वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी है। यही जांच स्पष्ट कर सकती है कि अलग अलग वॉइस नोट एक ही व्यक्ति की आवाज में हैं या अलग अलग व्यक्तियों की।

धर्मेश वधैर के नाम पर सिम, असली उपयोगकर्ता कौन?

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एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि संबंधित सिम कार्ड धर्मेश वधैर के नाम पर पंजीकृत बताया जा रहा है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि सिम कार्ड का वास्तविक इस्तेमाल कौन कर रहा था और व्हाट्सएप खाते का संचालन किसके द्वारा किया जा रहा था। क्या धर्मेश वधैर से पूछताछ की गई है? क्या सिम किसी दूसरे व्यक्ति के पास था? इसकी पुष्टि के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच जरूरी है। सिम किसी व्यक्ति के नाम पर होने मात्र से उसे धमकी देने का दोषी नहीं माना जा सकता।

सबसे बड़ा सवाल, क्या लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कोई संबंध है?

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इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि क्या आरोपी या इस प्रकरण से जुड़े अन्य लोगों का लॉरेंस बिश्नोई गैंग से किसी भी तरह का संबंध है? आरोपी का कथित तौर पर यह कहना कि वह किसी गैंग से जुड़ा नहीं है, अपने आप में इस सवाल का पर्याप्त जवाब नहीं है। हालांकि, केवल गैंग का नाम लेकर धमकी देना भी वास्तविक संबंध का प्रमाण नहीं है। पुलिस को इस पहलू की निष्पक्ष जांच करनी होगी और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, संपर्कों तथा अन्य तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना होगा।

अब पुलिस के सामने पांच बड़े सवाल

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  1. 13 अक्टूबर का हेलो संदेश किसने भेजा और आरोपी ने पहले इनकार के बाद दीपक का नाम क्यों लिया?
  2. 18 अक्टूबर के दो धमकी भरे वॉइस नोट और 20 अक्टूबर के लिंक के बाद आए वॉइस नोट की आवाज अलग क्यों बताई जा रही है?
  3. धर्मेश वधैर के नाम पर पंजीकृत सिम कार्ड का वास्तविक उपयोगकर्ता कौन था?
  4. क्या धमकी के पीछे केवल आरोपी था या अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है?
  5. क्या आरोपी अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों का लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कोई वास्तविक संबंध है?

नागपुर से आरोपी को पकड़कर लाना जांच में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन असली सच्चाई सामने लाने के लिए उसके कथित बयान की स्वतंत्र पुष्टि, वॉइस नोट की फोरेंसिक जांच और सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का सत्यापन जरूरी है। अब देखना होगा कि गाजियाबाद पुलिस की आगे की जांच इन अनसुलझे सवालों के जवाब दे पाती है या नहीं।

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