गाजियाबाद (शिखर समाचार)।
सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और केंद्र सरकार की पीएम रहता तथा राह-वीर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभागार गाजियाबाद में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन, अपर पुलिस उपायुक्त यातायात वरुण, पीएम-राहत एवं राह-वीर योजना के नोडल अधिकारी सहित विभिन्न चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
निजी अस्पतालों को दिया प्रशिक्षण, पोर्टल पर पंजीकरण के निर्देश
कार्यशाला में आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों के चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को पीएम रहता एवं राह-वीर योजना के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में त्वरित उपचार और सरकारी योजनाओं का लाभ पीड़ितों तक समय पर पहुंचाना सभी संबंधित अस्पतालों और चिकित्सा कर्मियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सभी निजी अस्पतालों को निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटना से संबंधित प्रत्येक मामले का पीएम रहता पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण किया जाए। साथ ही इन मामलों की प्रत्येक 15 दिन में नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए, ताकि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंच सके।
पीएम राहत योजना में 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार
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अधिकारियों ने बताया कि पीएम राहत योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को दुर्घटना के बाद शुरुआती सात दिनों तक अथवा अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का उद्देश्य दुर्घटना के बाद गोल्डन आवर में पीड़ित को बिना आर्थिक चिंता के तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर उसकी जान बचाना है।
कार्यशाला में राह-वीर योजना की भी विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल को गोल्डन आवर के दौरान अस्पताल पहुंचाने में मदद करता है तो उसे सरकार की ओर से 25 हजार रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाता है। इसके अलावा ऐसे मददगार व्यक्ति को कानूनी संरक्षण भी प्रदान किया जाता है, जिससे वह बिना किसी भय या कानूनी परेशानी के दुर्घटना पीड़ित की सहायता कर सके। अपर पुलिस उपायुक्त ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में समय पर उपचार मिलने से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इसके लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। कार्यशाला के दौरान चिकित्सकों और अस्पताल प्रतिनिधियों ने भी योजनाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की तथा पोर्टल संचालन, पंजीकरण प्रक्रिया और उपचार संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी प्राप्त की।
