पं. दीनदयाल उपाध्याय के समग्र जीवन दर्शन को सामने लाती है चन्दन कुमार की पुस्तक समर्पण

Rashtriya Shikhar
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Pandit Deendayal Upadhyaya’s holistic life philosophy is presented in Chandan Kumar’s book Samarpan — IMAGE CREDIT TO रिपोर्टर

वाराणसी (शिखर समाचार)।

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए), वाराणसी क्षेत्रीय केन्द्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन एवं विचारों पर आधारित पुस्तक समर्पण पर पुस्तक परिचर्चा एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्वानों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन दर्शन, एकात्म मानववाद और उनकी विचारधारा की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की।

पुस्तक परिचर्चा एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय ज्ञान परंपरा के विद्वान एवं सामाजिक चिंतक विद्याप्रसाद मिश्र रहे, जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य रामाशीष सिंह ने की। पुस्तक के लेखक चन्दन कुमार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर आधारित वृत्तचित्र के प्रदर्शन से हुआ। इसके बाद भारत माता और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर बृहस्पति पाण्डेय ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।

पुस्तक समर्पण पर विस्तृत चर्चा और लोकार्पण

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स्वागत उद्बोधन में आईजीएनसीए, वाराणसी के निदेशक डॉ. अभिजित दीक्षित ने कार्यक्रम की विषयवस्तु और उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने लेखक सहित सभी विशिष्ट अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया।

पुस्तक के लेखक चन्दन कुमार ने अपनी नवप्रकाशित पुस्तक समर्पण की अवधारणा, लेखन प्रक्रिया तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। इसके पश्चात अतिथियों एवं विद्वानों द्वारा पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण किया गया।

विचारकों ने दी एकात्म मानववाद पर व्याख्या

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मुख्य अतिथि विद्याप्रसाद मिश्र ने कहा कि यह पुस्तक लेखक और प्रकाशक के सतत परिश्रम तथा समर्पण का परिणाम है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन में निहित शिवत्व तथा उनके एकात्म मानववाद के दर्शन को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि यह पुस्तक उनके जीवन दर्शन को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम सिद्ध होगी।

अध्यक्षीय संबोधन में रामाशीष सिंह ने कहा कि जब आदर्श व्यवहार में उतरते हैं, तब दीनदयाल जैसे व्यक्तित्वों का निर्माण होता है। उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पण, प्रतिबद्धता और लोकमंगल की भावना को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन का मूल आधार बताते हुए कहा कि उनका जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

देशभर के विद्वानों की रही सहभागिता

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कार्यक्रम के अंत में नागपुर से आए स्वप्निल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। संचालन डॉ. रजनीकांत त्रिपाठी ने किया।

इस अवसर पर तमिलनाडु से वी. थिल्लई, डॉ. आनन्द धी राजा और आर.आर. मुर्गेश, कर्नाटक से डॉ. पुनीत कुमार, बिहार से कुमकुम भारद्वाज, दिल्ली से अजय शर्मा, लखनऊ से गौतम उपाध्याय तथा आंध्र प्रदेश से बाला कृष्ण सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए अनेक विद्वान एवं चिंतक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में काशी के वरिष्ठ समाजसेवियों, कला-प्रेमियों, बुद्धिजीवियों तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। विचार विमर्श से परिपूर्ण यह आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को नए दृष्टिकोण से समझने और उनकी समकालीन प्रासंगिकता पर सार्थक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना।

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