नगीना/बिजनौर (शिखर समाचार)। नगर की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने कताई मिल परिसर की खाली पड़ी भूमि पर कृषि विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की मांग उठाई है। इस संबंध में शनिवार को उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री को संबोधित 10 सूत्रीय ज्ञापन एसडीएम की अनुपस्थिति में उनके पेशकार रमेश सिंह को सौंपा गया।
कताई मिल भूमि के उपयोग पर उठी मांग
ज्ञापन में कहा गया कि नगीना ब्रिटिश काल से ही महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है, लेकिन विकास के मामले में लगातार उपेक्षित रहा। वर्तमान समय में यहां के अधिकांश लोगों की आजीविका कृषि पर आधारित है। कताई मिल बंद होने के बाद बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए हैं। साथ ही मिल की लगभग 280 बीघा भूमि पर बनी इमारतें खंडहर में तब्दील होती जा रही हैं।
कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग
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प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि कताई मिल की भूमि को हस्तशिल्प कार्य के लिए औद्योगिक क्षेत्र घोषित करने की तैयारी की जा रही है। इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों ने नगीना-कोतवाली मार्ग स्थित इस भूमि पर कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग की। उनका कहना है कि कृषि विश्वविद्यालय बनने से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और किसानों को आधुनिक कृषि शिक्षा एवं तकनीक का लाभ प्राप्त होगा।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
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ज्ञापन सौंपने वालों में पूर्व विधायक सतीश कुमार, डॉ. संदीप शर्मा, विशाल गुप्ता, प्रदीप गर्ग, संजीव दत्त शर्मा, मनोज वाल्मीकि, प्रदीप शर्मा, गर्वित प्रताप सिंह, अफसर सिद्दीकी, आफताब अंसारी, सुगम चंद, अनंत जैन, नौबहार प्रजापति, मोहित यादव, राजकुमार, रेवेन्यू बार अध्यक्ष, रामेश्वरी, मीरा देवी, बबीता, भारती, उमा देवी, चत्रो देवी और सुनीता देवी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
