सन्दीप शर्मा
देहरादून (शिखर समाचार)। प्रदेश में भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक में कुल 125 मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें 45 प्रकरणों का निस्तारण कर दिया गया, जबकि 24 गंभीर मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश जारी किए गए।
बैठक में सामने आया कि भूमि धोखाधड़ी के मामलों में देहरादून जनपद सबसे अधिक प्रभावित है, जहां से 74 नए प्रकरण सामने आए हैं। इसके अलावा हरिद्वार से 15, पौड़ी से 13, टिहरी से 2 और चमोली से 1 मामला समिति के समक्ष प्रस्तुत हुआ।
आयुक्त ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भूमि से जुड़े फर्जीवाड़े को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी मामलों का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जिन प्रकरणों में संयुक्त निरीक्षण आवश्यक है, उन्हें एक सप्ताह के भीतर पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
खसरा हेरफेर से दोहरी बिक्री तक, फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा
सुनवाई के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि कुछ मामलों में बिना जमीन के ही बिक्री कर दी गई, कहीं खसरा नंबर में हेरफेर कर अलग भूमि बेची गई, तो कहीं 2 बीघा जमीन को 4 बीघा बताकर लोगों को ठगा गया। इसके अलावा भूमि पर अवैध कब्जा कर तारबाड़ करने और जमीन को खुर्द-बुर्द करने जैसे गंभीर मामले भी सामने आए हैं।
इन मामलों में उदय सिंह, सुचेता सेमवाल, राजीव जायलवाल, गुलाब सिंह, किरन बागड़ी, अजय कुमार, संजीव गर्ग, मिथलेश सिंघल, जगदंबा रावत, अर्जुन सिंह और सामरजी देवी समेत कई शिकायतकर्ताओं के प्रकरण शामिल हैं। आयुक्त ने पुलिस को इन मामलों में तत्काल और कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
15 दिन में प्रगति लाने के निर्देश
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आयुक्त ने बड़े भू-प्रकरणों में कार्रवाई में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों में 15 दिनों के भीतर ठोस प्रगति सुनिश्चित की जाए। जिन मामलों में अवैध निर्माण सिद्ध हो चुका है, वहां तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जिन मामलों में भूमि धोखाधड़ी स्पष्ट रूप से सामने आती है, उनमें अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं, जो मामले भूमि धोखाधड़ी की श्रेणी में नहीं आते, उनकी जानकारी शिकायतकर्ताओं को पारदर्शिता के साथ दी जाए।
आपसी समझौते और न्यायालयीन मामलों का भी निस्तारण
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बैठक में 45 मामलों का निस्तारण किया गया, जिनमें कई मामलों में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बन गई। कुछ मामलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप से धनराशि वापस कराई गई, जबकि कुछ प्रकरण ऐसे पाए गए जो पहले से सिविल न्यायालय में लंबित हैं और उनमें भूमि धोखाधड़ी नहीं पाई गई। ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए न्यायालयीन प्रक्रिया को ही उपयुक्त माना गया।

अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश
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आयुक्त ने निर्देश दिए कि न्यायालय में लंबित मामलों को छोड़कर अन्य सभी प्रकरणों में विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और किसी भी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। साथ ही, भूमि विवादों की प्रारंभिक स्तर पर ही पहचान कर आवश्यक रोकथाम उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया, ताकि भविष्य में बड़े विवाद उत्पन्न न हों।
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान, अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, अपर जिलाधिकारी टिहरी शैलेन्द्र सिंह नेगी, एसपी (ग्रामीण) जया बलूनी, डीजीसी नितिन वशिष्ट, एसडीएम डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल सहित विभिन्न तहसीलों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
स्पष्ट है कि प्रशासन अब भूमि धोखाधड़ी पर पूरी तरह सख्त है और आने वाले समय में ऐसे मामलों में और भी तेज़ कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
