लखनऊ (शिखर समाचार)। यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन ने कर्मचारी भविष्य निधि में योगदान के लिए मासिक वेतन सीमा बढ़ाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन न्यूनतम पेंशन में कोई वृद्धि नहीं किए जाने पर निराशा व्यक्त की है। यूनियन ने कहा कि सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि में योगदान के लिए मासिक वेतन सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी है। इससे देशभर के करीब एक करोड़ कर्मचारियों को लाभ मिलने की संभावना है, लेकिन न्यूनतम पेंशन की मौजूदा राशि एक हजार रुपये प्रतिमाह पर कोई बदलाव नहीं किया गया है।
यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग
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यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन ने पिछले वर्ष नवंबर में अयोध्या में आयोजित प्रादेशिक प्रतिनिधि सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कर न्यूनतम पेंशन एक हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की थी। यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर के माध्यम से केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को भेजा गया था। प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद अनिल राजभर ने केंद्रीय श्रम मंत्री से मुलाकात कर इस मांग की सिफारिश करने का आश्वासन दिया था। महोबा सम्मेलन में एक बार फिर न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।
न्यूनतम पेंशन पर कोई निर्णय न होने पर यूनियन की निराशा
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यूनियन के प्रादेशिक अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी, महामंत्री देवराज सिंह और लखनऊ मंडल अध्यक्ष शिवशरण सिंह ने न्यूनतम पेंशन के संबंध में निर्णय न लिए जाने पर निराशा जताई। उन्होंने घोषणा की कि वे सीधे केंद्रीय श्रम मंत्री से मुलाकात कर न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को मजबूती से रखेंगे। यूनियन का कहना है कि विभिन्न वर्गों को हजारों रुपये की पेंशन दी जा रही है, जबकि लंबे समय तक नौकरी करने वाले कर्मचारी न्यूनतम एक हजार रुपये की पेंशन पर निर्भर हैं। यूनियन ने इसे कर्मचारियों के हितों के अनुरूप नहीं बताते हुए पेंशन में वृद्धि की मांग दोहराई।
