प्रयागराज/नोएडा (शिखर समाचार)। नौकरी दिलाने के नाम पर 12 लाख रुपये की कथित ठगी और फर्जी नियुक्ति पत्र देने के मामले में जेल में बंद सपना अरोड़ा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद उसे मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने तक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति जय प्रकाश तिवारी ने आपराधिक विविध जमानत प्रार्थना पत्र संख्या 23705/2026 पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
मामला गौतमबुद्ध नगर के नोएडा सेक्टर-49 थाने में दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। प्राथमिकी में चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोप है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता और उसकी बहनों को रेलवे तथा नोएडा प्राधिकरण में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर 12 लाख रुपये लिए। शिकायतकर्ता को कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिया गया। बाद में रकम वापस मांगने पर धमकी देने का आरोप लगाया गया और 10 लाख रुपये का चेक दिया गया, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर अनादरित हो गया।
बचाव पक्ष की दलीलें और हाईकोर्ट का निर्णय
सपना अरोड़ा की ओर से अधिवक्ता अपूर्व हजेला ने दमदार पैरवी और प्रभावी दलीलों के माध्यम से कोर्ट के समक्ष पक्ष रखा कि आवेदिका का शिकायतकर्ता से रकम लेने या उसे धनराशि देने के लिए प्रेरित करने से कोई संबंध नहीं है। उसके बैंक खाते में भी कोई रकम जमा होने का आरोप नहीं है। कथित भुगतान के बदले दिया गया चेक उसके पति सहआरोपी मनोज अरोड़ा ने हस्ताक्षर कर जारी किया था। सपना अरोड़ा न तो चेक की हस्ताक्षरकर्ता है और न ही संबंधित बैंक खाते का संचालन करती है।
जमानत की शर्तें और जेल से रिहाई
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बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि कथित घटना वर्ष 2022 की है, जबकि प्राथमिकी करीब दो वर्ष बाद दर्ज हुई। विवेचना के दौरान भी आवेदिका को कथित अपराध से जोड़ने वाला कोई ठोस आपत्तिजनक साक्ष्य सामने नहीं आया। कोर्ट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए जमानत मंजूर कर ली। सपना अरोड़ा 27 मई 2026 से जेल में थी। कोर्ट ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने और निर्धारित तिथियों पर अदालत में उपस्थित रहने समेत विभिन्न शर्तें लगाई हैं।
