नई दिल्ली (शिखर समाचार) अठारहवीं लोक सभा का छठा सत्र, जो 1 दिसम्बर को प्रारंभ हुआ था, 19 दिसंबर को अपने समापन पर पहुँच गया, इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष ने सदस्यों के समक्ष सत्र की सभी गतिविधियों और उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। सत्र के दौरान कुल पंद्रह बैठकें आयोजित हुईं, जिनकी कुल अवधि बयासी घंटे पच्चीस मिनट रही, अध्यक्ष ने बताया कि कार्य उत्पादकता इस सत्र में 111 प्रतिशत रही जो पिछले सत्रों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक थी, उन्होंने कहा कि इस सत्र में दस सरकारी विधेयक पुनः प्रस्तुत किए गए और उनमें से आठ विधेयक पारित हुए, पारित विधेयकों में मणिपुर माल एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, विनियोग (संख्यांक 4) विधेयक, निरसन और संशोधन विधेयक, सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा विधि का संशोधन) विधेयक, भारत के रूपांतरण हेतु नाभिकीय ऊर्जा का सुरक्षित दोहन एवं अभिवर्धन विधेयक और विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक शामिल हैं।
सदन में सक्रियता की नई मिसाल: लंबी चर्चा और शून्य काल में उठे सैकड़ों मुद्दे
सत्र के दौरान राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चर्चा ग्यारह घंटे बत्तीस मिनट तक चली जिसमें 65 सदस्यों ने भाग लिया, इसके अतिरिक्त चुनावी सुधार के विषय पर तेरह घंटे तक चर्चा हुई जिसमें 63 सदस्यों ने विचार साझा किए, इस सत्र में कुल 300 तारांकित प्रश्न गृहीत किए गए और 72 प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिए गए, वहीं कुल 3449 अतारांकित प्रश्न सदन में प्रस्तुत किए गए। शून्य काल के दौरान सदस्यों ने 408 तत्कालीन लोक महत्व के मामले उठाए जिनमें से 372 मामलों पर विचार और चर्चा हुई और 11 दिसंबर को शून्य काल में 150 सदस्यों ने अपने मुद्दे उठाए।
सत्र में कुल 38 वक्तव्य प्रस्तुत किए गए जिनमें 35 निदेश 73क के अंतर्गत, दो नियम 372 के अंतर्गत और एक संसदीय कार्य मंत्री द्वारा दिया गया, इसके अतिरिक्त सदन के पटल पर कुल 2116 पत्र रखे गए और 41 संसदीय स्थायी समितियों के प्रतिवेदन प्रस्तुत हुए। गैर-सरकारी सदस्यों की गतिविधियों में 5 दिसंबर को 137 गैर-सरकारी विधेयक पेश किए गए और 12 दिसंबर को शफी परम्बिल द्वारा प्रस्तुत संकल्प चर्चा के बाद सदन की अनुमति से वापस लिया गया। सत्र के दौरान जॉर्जिया की संसद के अध्यक्ष शाल्वा पापुआश्विली और उनके संसदीय शिष्टमंडल का 2 दिसंबर को भारत की संसद ने हार्दिक स्वागत किया। इस तरह यह सत्र कई महत्वपूर्ण विधेयकों, व्यापक चर्चाओं और सक्रिय सहभागिता के साथ संपन्न हुआ।
