नक्का कुआं मंदिर में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का यज्ञ के साथ समापन

Rashtriya Shikhar
3 Min Read
Seven-Day Shrimad Bhagwat Katha Concludes with a Yagna at Nakka Kuan Temple IMAGE CREDIT TO रिपोर्टर

गढ़मुक्तेश्वर (शिखर समाचार)। गढ़मुक्तेश्वर स्थित महादेव नक्का कुआं मंदिर में चल रही सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन यज्ञ के साथ हुआ। कथा व्यास पंडित रामकृष्ण दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। कथा के समापन अवसर पर यज्ञाचार्य पंडित विनोद शर्मा शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ संपन्न कराया।

श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य का कल्याण

ALSO READ:https://www.jagran.com/uttar-pradesh/ghaziabad-indirapuram-woman-death-family-halts-last-rites-demands-probe-40199229.html

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ तीनों प्रकार के पापों का नाश करने वाला है। श्रीमद्भागवत भगवान कृष्ण की वाणी मानी गई है और इसके श्रवण एवं अध्ययन से मनुष्य का कल्याण होता है। उन्होंने धुंधकारी प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव से उसका उद्धार किया। पितृ पक्ष में श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण का विशेष महत्व बताया गया है। उन्होंने कहा कि इस दौरान श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ एवं श्रवण करने से अकाल मृत्यु को प्राप्त आत्माओं की मोक्ष प्राप्ति की कामना की जाती है।

यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित विनोद शर्मा शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के साथ यज्ञ किए जाने से वातावरण में सकारात्मकता आती है और पर्यावरण शुद्ध होता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के लिए यज्ञ के साथ अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए। विवाह एवं बच्चों के जन्मदिन जैसे अवसरों पर भी पौधारोपण को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि प्रकृति संरक्षण के साथ आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु मिल सके।

धार्मिक अनुष्ठान के बाद अन्न वितरण की परंपरा पर जोर

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/humorous-poetry-recitation-by-shambhu-shekhar/

उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णता के बाद अन्न वितरण की परंपरा का पालन किया जाना चाहिए। गरीब और असहाय लोगों को भोजन कराने से सेवा का भाव मजबूत होता है।

कथा एवं यज्ञ में मुकेश सैनी, माया देवी, समाजसेवी मदनपाल सिंह, मुख्य महंत बराहागिरी महाराज, डॉ. चरण सिंह सैनी, रूपेश पंडित, विष्णु दत्त नागर, डॉ. राकेश सैनी, नंदकिशोर उपाध्याय, डॉ. अरुण प्रधान, दर्शना गुप्ता, आशुतोष शर्मा, पंडित विजेंद्र शर्मा, मोहनलाल शर्मा, पंडित गोविंद शास्त्री, राम अवतार चौहान, लाला टेकचंद गर्ग, जयकुमार विश्नोई, प्रधानाचार्य ज्ञानेंद्र चौहान, अखिलेश वशिष्ठ, वीरपाल सैनी, करुणा भारद्वाज, अलका बिश्नोई, रेखा चौहान, सोनी राजपूत, राजकुमार प्रजापति सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

Share This Article
Leave a comment