मेरठ (शिखर समाचार)। मेरठ में भाजपा से जुड़े वरिष्ठ नेता को हाउस अरेस्ट किए जाने की खबर से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई। सिवालखास विधानसभा क्षेत्र के सरूरपुर खुर्द निवासी भारतीय मतदाता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय जागरूक ब्राह्मण महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव को मेरठ पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने की बात सामने आने के बाद उनके समर्थकों में तीखी नाराजगी है। समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बिना स्पष्ट कारण बताए किसी वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता को घर में नजरबंद करना लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़ा करता है। बताया गया कि वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन रवाना होने से पहले ही उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया।
समर्थकों का दावा है कि
समर्थकों का दावा है कि संबंधित नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामाजिक गतिविधियों के लिए सक्रिय रहे हैं और मेरठ की विभिन्न विधानसभा सीटों पर उनका व्यापक जनसंपर्क है। वह शोषित, पीड़ित और वंचित लोगों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने तथा न्याय एवं सम्मान के लिए संघर्ष करने का दावा करते हैं। विशेष ओलंपियाड भारत से जुड़े होने के साथ उनके संगठन की देश के 21 राज्यों में मौजूदगी होने की भी बात कही गई है।
समर्थकों ने कहा कि नेता स्वयं भाजपा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता रखते हैं और प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री की नीतियों के समर्थक हैं। ऐसे में उनकी नजरबंदी ने समर्थकों को और अधिक आक्रोशित कर दिया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि
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उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या वजह थी जिसके चलते पुलिस को उन्हें दिल्ली जाने से रोकते हुए घर में नजरबंद करना पड़ा। हालांकि पुलिस की ओर से इस कार्रवाई के कारण के संबंध में कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
समर्थकों ने चेतावनी दी कि यदि नजरबंदी का कारण सार्वजनिक नहीं किया गया और कार्रवाई का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मामला व्यापक सामाजिक मुद्दा बन सकता है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से कार्रवाई का आधार स्पष्ट करने और नेता को तत्काल मुक्त करने की मांग की है। फिलहाल इस घटनाक्रम को लेकर मेरठ के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है।
