नई दिल्ली (शिखर समाचार) भारत निर्वाचन आयोग की पहल पर भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन-2026 का शुभारंभ नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में हुआ। तीन दिनों तक चलने वाले इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन की शुरुआत एक औपचारिक स्वागत समारोह के साथ की गई, जिसमें विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों का अभिनंदन किया गया। समारोह के दौरान भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं, निर्वाचन व्यवस्था की व्यापकता और तकनीकी दक्षता को रेखांकित किया गया।
लोकतंत्र की वैश्विक गूंज: भारत की चुनावी पारदर्शिता पर दुनिया की नजर
सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी के साथ लगभग साठ अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया। इस दौरान “इंडिया डिसाइड्स” नामक वृत्तचित्र श्रृंखला की झलकियां भी प्रदर्शित की गईं, जिसने भारतीय चुनाव प्रक्रिया की जटिलता और पारदर्शिता को प्रभावशाली दृश्य माध्यम में प्रस्तुत किया।
उद्घाटन सत्र में लगभग एक हजार प्रतिभागियों की उपस्थिति रही। इसमें बयालीस निर्वाचन प्रबंधन संस्थानों के प्रतिनिधि, सत्ताईस देशों के राजदूत एवं उच्चायुक्त, सत्तर से अधिक राष्ट्रीय संस्थाओं के विशेषज्ञ, भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी तथा देशभर से आए छत्तीस मुख्य निर्वाचन अधिकारी शामिल रहे। यह सत्र लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन पर अंतर्राष्ट्रीय अनुभवों के आदान प्रदान का सशक्त मंच बना।
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का परिचय: भारत में निष्पक्ष और सुचारु चुनाव की मिसाल
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मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि बीते कुछ दशकों में निर्वाचन प्रबंधन संस्थानों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ी हैं। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत, अट्ठाईस राज्यों और आठ संघ राज्य क्षेत्रों में लगभग डेढ़ अरब जनसंख्या के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुचारु चुनाव संपन्न कराता है, जो अपने आप में एक अद्वितीय उदाहरण है।
निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधु ने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत नागरिकों के विश्वास में निहित है। हर चुनाव के केंद्र में मतदाता होता है, जिसे यह भरोसा रहता है कि उसकी राय का सम्मान होगा। इस विश्वास की रक्षा करना सभी निर्वाचन प्रबंधन संस्थानों का साझा दायित्व है।
ज्ञान और अनुभव का संगम: निर्वाचन प्रक्रिया सुधार के लिए साझा अंतर्राष्ट्रीय मंच
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निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने कहा कि यह सम्मेलन केवल नीति निर्माताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और व्यवहारिक विशेषज्ञों को भी एक साझा मंच प्रदान करता है, जिससे निर्वाचन प्रक्रियाओं को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझा और बेहतर बनाया जा सके।
सम्मेलन की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए भारतीय अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक राकेश वर्मा ने कहा कि भारत की अध्यक्षता का विषय समावेशी, शांतिपूर्ण, सहनशील और सुदृढ़ विश्व के लिए लोकतंत्र इक्कीसवीं सदी में लोकतंत्र की व्यापक और बहुस्तरीय भूमिका को स्पष्ट करता है।
“इंडिया डिसाइड्स”: सशक्त दृश्य माध्यम में दुनिया के सबसे जटिल चुनाव की झलक
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कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित “इंडिया डिसाइड्स” वृत्तचित्र श्रृंखला के संबंध में वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के प्रबंध निदेशक अर्जुन नोहर ने कहा कि यह श्रृंखला सशक्त दृश्य प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय आम चुनावों की प्रक्रिया को दिखाएगी, जिसे विश्व के सबसे जटिल लोकतांत्रिक अभ्यासों में गिना जाता है।
सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित पूर्ण अधिवेशन में बयालीस निर्वाचन प्रबंधन संस्थानों के प्रमुखों ने भाग लिया। इस सत्र का शुभारंभ मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने संयुक्त रूप से किया। अधिवेशन में विभिन्न देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों सहित लगभग साठ अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस मंच पर लोकतंत्र और निर्वाचन प्रशासन के सामने मौजूद वैश्विक चुनौतियों पर गंभीर और व्यापक विचार विमर्श हुआ। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन सहायता संस्था के अध्यक्ष के रूप में वर्ष 2026 की विषयगत प्राथमिकताओं को साझा किया, जिस पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और सुझाव प्रस्तुत किए। कुल मिलाकर, IICDEM-2026 का पहला दिन लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
