मोदीनगर (शिखर समाचार)
भाजपा द्वारा आयोजित विकसित भारत संकल्प सम्मेलन उस समय विवादों में घिर गया, जब कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के दो गुटों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि धक्का-मुक्की और मारपीट जैसी स्थिति बन गई। कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ नेताओं के सामने करीब एक घंटे तक हंगामा चलता रहा।
सम्मेलन के दौरान दो गुटों में टकराव
कोतवाली के सामने स्थित दुल्हन बैंक्विट हॉल में मंगलवार दोपहर आयोजित सम्मेलन में भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया, जिला अध्यक्ष चैनपाल सिंह, विधायक डॉ. मंजू सिवाच समेत कई वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद थे। बताया गया कि जैसे ही क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया ने अपना संबोधन समाप्त किया, भाजपा की जिला उपाध्यक्ष गीता कौशिक बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी हो गईं और विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया।
शिकायतों को लेकर नाराजगी और विरोध प्रदर्शन
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गीता कौशिक का आरोप था कि उन्होंने कुछ समय पहले पार्टी के जिला उपाध्यक्ष नितिन मित्तल के खिलाफ अभद्रता और अशोभनीय टिप्पणी करने की शिकायत दर्ज कराई थी। इस संबंध में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर गीता कौशिक और उनके समर्थकों ने क्षेत्रीय अध्यक्ष का घेराव करते हुए नाराजगी जताई और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
माहौल बिगड़ा, नेताओं ने संभाली स्थिति
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हंगामे के दौरान कार्यकर्ता दो गुटों में बंटे नजर आए। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को संभालने के लिए विधायक डॉ. मंजू सिवाच ने मोर्चा संभाला और विरोध कर रही महिलाओं को समझाकर शांत कराया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामे के बीच ही क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया और जिला अध्यक्ष चैनपाल सिंह कार्यक्रम स्थल से रवाना हो गए। हालांकि बाद में सत्येंद्र सिसोदिया ने कहा कि पार्टी में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी कार्यकर्ता को कोई शिकायत है तो वह उसे उचित मंच पर रख सकता है, जिसका समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि नितिन मित्तल को उनके दायित्वों से मुक्त किया जा चुका है।
वहीं गीता कौशिक ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह आत्मघाती कदम उठाने तक के लिए मजबूर हो सकती हैं।
घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में इस प्रकरण की चर्चा तेज हो गई है और पार्टी संगठन के भीतर उठे इस विवाद को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
