भागलपुर/बिहार (शिखर समाचार) डिजिटल माध्यम की तेज़ होती रफ्तार ने सूचना के प्रसार को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ गई है। डिजिटल मंच पर सक्रिय लोगों को केवल सामग्री तैयार करने वाला नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला और सुधार की पहल करने वाला बनना चाहिए। यह विचार भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक संजय द्विवेदी ने वेब जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित वेब मीडिया समागम 2025 में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों तक पहुंचने वाली हर अभिव्यक्ति अपने आप में प्रभावशाली संदेश होती है, इसलिए सामग्री का उद्देश्य केवल चर्चा में आना नहीं, बल्कि समाज के लिए उपयोगी और मूल्यवान होना चाहिए।
लोकप्रियता से आगे सामाजिक सरोकार: जिम्मेदार पत्रकारिता ही सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि लोकप्रियता की होड़ से अधिक आवश्यक है सामाजिक सरोकार। ऐसी पत्रकारिता समय की मांग है जो नागरिक विवेक को जागृत करे, समाज को सकारात्मक दिशा दे और संवाद की संस्कृति को मजबूत बनाए। तथ्यहीन सूचनाएं, भ्रामक प्रचार और सनसनी फैलाने वाली प्रस्तुति से भरोसे का संकट पैदा हो रहा है। तकनीकी प्रणालियों के दबाव में केवल चलन के पीछे भागना रचनात्मक सोच को सीमित कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पसंद, अनुयायी और दृश्य संख्या की अंधी दौड़ मानसिक दबाव और आत्मसम्मान की समस्या को जन्म दे रही है, जबकि वैचारिक ध्रुवीकरण और अपमानजनक टिप्पणियों की प्रवृत्ति सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचा रही है।
संजय द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदार डिजिटल पत्रकार वही है जो सत्य, संवेदना और जनहित को प्राथमिकता दे। विश्वसनीय जानकारी प्रस्तुत करना, सकारात्मक विमर्श को बढ़ावा देना, आंचलिक भाषाओं और स्थानीय मुद्दों को महत्व देना, आम लोगों की समस्याओं को स्वर देना और मानवीय भावनाओं को जीवंत रखना आज की डिजिटल नैतिकता की आधारशिला है। उन्होंने वेब पत्रकारों से कहा कि उनके पास केवल उपकरण नहीं, बल्कि समाज को उजाला देने की क्षमता है। आज की पीढ़ी बिना पारंपरिक कार्यालय के पत्रकार, बिना मंच के विचारक और बिना स्टूडियो के कलाकार है। ऐसे समय में तोड़ने से अधिक जोड़ने वाली पत्रकारिता की आवश्यकता है।
मूल्यों से जुड़ी पत्रकारिता ही तकनीक के युग में परिवर्तन की सबसे सशक्त आवाज
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समागम को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि हर दौर में पत्रकारों ने अपनी लेखनी से परिवर्तन की भूमिका निभाई है। तकनीक के इस युग में भी यदि पत्रकार अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों से जुड़े रहें तो पत्रकारिता अधिक प्रभावशाली बन सकती है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक ने अभिव्यक्ति के नए अवसर खोले हैं, लेकिन मूल्यों से जुड़ाव बनाए रखना जरूरी है।
वरिष्ठ पत्रकार बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि बीते डेढ़ दशक में सूचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। सस्ते इंटरनेट और व्यापक पहुंच ने सूचना के लोकतंत्रीकरण को संभव बनाया है। अब किसी भी खबर को दबाकर रखना लगभग असंभव है। उन्होंने वेब पत्रकारों से आह्वान किया कि वे समाज का विश्वास अर्जित करें, क्योंकि सीमित संसाधनों के बावजूद सत्यापन की जिम्मेदारी सबसे अधिक उन्हीं पर होती है। उन्होंने कहा कि बड़ी संस्थाओं की तुलना में वेब पत्रकारों की चुनौतियां अधिक हैं, लेकिन उनकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद कौशल, राष्ट्रीय महासचिव अमित रंजन सहित अनेक वरिष्ठ पत्रकार और देश के विभिन्न राज्यों से आए डिजिटल मीडिया प्रतिनिधि शामिल हुए। समागम के दौरान विभिन्न सत्रों में डिजिटल पत्रकारिता के भविष्य, संगठन के विस्तार और मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी पर व्यापक विमर्श किया गया।
