——भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत भाषा से नई पीढ़ी को जोड़ने की पहल
गाजियाबाद (शिखर समाचार)। भारतीय संस्कृति, सनातन ज्ञान परंपरा और संस्कृत भाषा के गौरवशाली इतिहास को आधुनिक एवं आकर्षक स्वरूप में आमजन तक पहुंचाने की दिशा में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा इंदिरापुरम में विकसित किया जा रहा ‘संस्कृत दर्शन पार्क’ अब अपने पूर्ण स्वरूप की ओर तेजी से बढ़ रहा है। करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किए जा रहे इस अनूठे पार्क के निर्माण एवं विकास कार्यों की प्राधिकरण अधिकारियों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का जोर शेष कार्यों को निर्धारित गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप शीघ्र पूरा कराने पर है।
वेद, उपनिषद और भारतीय दर्शन की दिखेगी झलक
संस्कृत दर्शन पार्क को सामान्य उद्यान के बजाय ज्ञान, संस्कृति, प्रकृति और आधुनिकता के समन्वय वाले विशिष्ट सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां वेद, उपनिषद, महाकाव्य, भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को आकर्षक एवं रोचक ढंग से प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में भारतीय ज्ञान परंपरा तथा संस्कृत भाषा के प्रति रुचि और जिज्ञासा विकसित करना है।
फव्वारे, जल संरचनाएं और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था होंगी आकर्षण
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पार्क में विभिन्न विषयों पर आधारित विशेष संरचनाएं, संस्कृत के श्लोक एवं सूक्तियां, आकर्षक भू-दृश्यांकन, फव्वारे एवं जल संरचनाएं, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था तथा जनसुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इन सुविधाओं के माध्यम से लोगों को मनोरंजन के साथ भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा को जानने-समझने का अवसर मिलेगा।
अक्टूबर में आमजन के लिए खुलने की संभावना
जीडीए उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल ने कहा कि संस्कृत दर्शन पार्क को केवल एक उद्यान के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय वाले विशेष स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की लगातार समीक्षा की जा रही है। प्रयास है कि शेष कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप शीघ्र पूरे कराकर अक्टूबर में पार्क को आमजन के लिए उपलब्ध कराया जा सके।
जीडीए अधिकारियों द्वारा निर्माण स्थल का नियमित निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जा रही है। पार्क शुरू होने के बाद गाजियाबाद के नागरिकों, विद्यार्थियों, युवाओं और पर्यटकों को ऐसा सार्वजनिक स्थल उपलब्ध होगा, जहां आधुनिक वातावरण में भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और प्राचीन ज्ञान परंपरा से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
