प्रयागराज (शिखर समाचार)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद निवासी रविंद्र सिंह चौहान के हिस्ट्रीशीट से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को 13 अक्टूबर 2023 को प्रस्तुत प्रत्यावेदन पर तीन माह के भीतर नियमानुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने आपराधिक विविध रिट याचिका संख्या 14456/2026 की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
चार मुकदमों में बरी होने का दिया हवाला
याची की ओर से हाई कोर्ट के अधिवक्ता अपूर्व हजेला ने दमदार पैरवी करते हुए प्रभावी दलीलें पेश कीं। उन्होंने न्यायालय को बताया कि याची के विरुद्ध बनाए गए हिस्ट्रीशीट संख्या 165-ए में नौ मुकदमों का उल्लेख किया गया है, जबकि इनमें से चार मामलों में याची को न्यायालय से बरी किया जा चुका है। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस विनियमावली के अध्याय 20 के नियम 231 का भी हवाला देते हुए हिस्ट्रीशीट के संबंध में याची के अधिकार और परिस्थितियों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखा।
पुलिस आयुक्त को तीन माह में निर्णय लेने के निर्देश
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अधिवक्ता अपूर्व हजेला ने न्यायालय को यह भी बताया कि हिस्ट्रीशीट संख्या 165-ए को लेकर याची ने 13 अक्टूबर 2023 को संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बावजूद उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने न्यायालय से अभ्यावेदन का समयबद्ध तरीके से निस्तारण कराने का अनुरोध किया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अपर शासकीय अधिवक्ता ने भी इस मांग पर गंभीर आपत्ति नहीं जताई और स्वीकार किया कि अभ्यावेदन का उचित समय में निस्तारण किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि प्रमाणित आदेश की प्रति और प्रत्यावेदन की नई प्रति प्राप्त होने के बाद तीन माह के भीतर 13 अक्टूबर 2023 के प्रत्यावेदन पर निर्णय लिया जाए। आदेश के बाद अब हिस्ट्रीशीट को लेकर प्रस्तुत प्रत्यावेदन पर पुलिस विभाग को निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई करनी होगी।
