बिजनौर (शिखर समाचार)। जनपद के बहुचर्चित प्रबल हत्याकांड में 14 वर्ष बाद न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सातों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक न्यायालय (द्वितीय) के न्यायाधीश शहजाद अली ने प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही न्यायालय ने मामले की विवेचना में गंभीर लापरवाही बरतने वाले विवेचक और तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आचरण की जांच कराने के लिए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजने के आदेश दिए हैं।
सातों दोषियों को उम्रकैद, लाखों का जुर्माना
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अजीत पवार और प्रमोद कुमार शर्मा के अनुसार न्यायालय ने 29 जुलाई को सभी आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि शुक्रवार को सजा सुनाई गई। न्यायालय ने हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये का जुर्माना, अपहरण के मामले में सात वर्ष के कठोर कारावास एवं 10 हजार रुपये तथा साक्ष्य मिटाने के अपराध में तीन वर्ष के कारावास एवं पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की कुल राशि का 90 प्रतिशत हिस्सा पीड़ित परिवार को क्षतिपूर्ति के रूप में दिया जाए।
14 साल बाद मिला पीड़ित परिवार को न्याय
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दोषियों में संजय गुप्ता, विनय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, राहुल गुप्ता और आशीष उर्फ आशु शामिल हैं। फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत कक्ष खचाखच भरा रहा। निर्णय के बाद दोषियों के परिजनों में चीख पुकार मच गई, जबकि मृतक प्रबल की बहन प्राची ने न्यायालय के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका पर उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।

बैंक्वेट हॉल में हत्या के बाद गंगा में फेंका था शव
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सरकारी पक्ष के अनुसार वर्ष 2012 में बिजनौर के शहनाई बैंक्वेट हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रबल की हत्या कर शव को गंगा नदी में फेंक दिया गया था, ताकि साक्ष्य मिटाए जा सकें। इस चर्चित मुकदमे में 17 गवाहों के बयान दर्ज हुए और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अंततः पीड़ित परिवार को न्याय मिला।
