नई दिल्ली (शिखर समाचार)। जर्मनी की राजधानी बर्लिन स्थित प्रतिष्ठित बैबिलोन सिनेमा में 4 से 13 जुलाई 2026 तक आयोजित 14वें इंडो-जर्मन फिल्म सप्ताह में भारतीय लघु फिल्म अवेकन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया है। इस वर्ष पहली बार शामिल की गई कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित लघु फिल्म श्रेणी में अवेकन को सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम बुद्धिमत्ता लघु फिल्म के सम्मान से नवाजा गया। विशेष बात यह रही कि यह फिल्म पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित हुई और अपनी पहली ही प्रस्तुति में यह प्रतिष्ठित उपलब्धि हासिल करने में सफल रही।
पहली ही अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुति में मिला बड़ा सम्मान
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/town-vending-committee-meeting-in-presence/
फिल्म का लेखन एवं निर्देशन मिलिंद दामले ने किया है, जबकि निर्माण प्राजक्ता दामले ने किया। मेधप्रणव पोवार ने सह-निर्देशक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रमुख के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूरी टीम के रचनात्मक दृष्टिकोण, तकनीकी दक्षता और नवीन प्रयोगों ने फिल्म को वैश्विक मंच पर विशिष्ट पहचान दिलाई।
अवेकन की कहानी एक दादी और एक कौवे के बीच प्रतिदिन होने वाले आत्मीय संवाद पर आधारित है। साधारण घटनाओं से शुरू होकर यह कथा मानवीय संवेदनाओं, स्मृतियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी समन्वय के माध्यम से दर्शकों को गहराई से प्रभावित करती है। भावनात्मक प्रस्तुति, सशक्त कथानक और आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग के कारण इसे निर्णायकों और दर्शकों दोनों की सराहना मिली।
भारतीय सिनेमा और नई तकनीक के प्रयोग को मिली वैश्विक पहचान
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/humorous-poetry-recitation-by-shambhu-shekhar/
फिल्म की टीम ने इस सम्मान को भारतीय स्वतंत्र सिनेमा और रचनात्मक तकनीकी प्रयोगों की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बताया। उनका कहना है कि यह उपलब्धि भविष्य में और अधिक प्रयोगधर्मी तथा प्रभावशाली फिल्मों के निर्माण के लिए प्रेरणा देगी।
फिल्म सप्ताह में मिली यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि उत्कृष्ट कहानी, सशक्त निर्देशन और नवीन तकनीक के समन्वय से भारतीय सिनेमा विश्व मंच पर नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकता है।
