मेरठ परिक्षेत्र में 6,846 हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन, जून में 67 नई हिस्ट्रीशीट खोली गईं

Rashtriya Shikhar
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Verification of 6,846 History-Sheeters Conducted in Meerut Range; 67 New History Sheets Opened in June IMAGE CREDIT TO POLICE

मेरठ (शिखर समाचार): ‘ऑपरेशन हिस्ट्रीशीटर’ के तहत 6,846 अपराधियों का हुआ सत्यापन, 67 नई हिस्ट्रीशीट खोली गईं

मेरठ परिक्षेत्र में अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन हिस्ट्रीशीटर’ की समीक्षा की गई। जून माह में मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ जनपदों में कुल 6,846 हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन और निगरानी की गई। इस दौरान 67 नए अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोली गई, जबकि पांच हिस्ट्रीशीटरों की मृत्यु के बाद उनकी हिस्ट्रीशीट समाप्त कर दी गई। सभी हिस्ट्रीशीटरों का शत-प्रतिशत विवरण ‘यक्ष’ अनुप्रयोग पर दर्ज कर दिया गया है।

773 हिस्ट्रीशीटर जेलों में निरुद्ध, डीआईजी ने दिए सख्त निर्देश

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पुलिस उपमहानिरीक्षक, मेरठ परिक्षेत्र, कलानिधि नैथानी ने बताया कि जून माह में अपराधियों के सत्यापन अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित किया गया। वर्तमान में परिक्षेत्र के 773 हिस्ट्रीशीटर विभिन्न जेलों में बंद हैं। जनपदवार आंकड़ों के अनुसार मेरठ में 13, बुलंदशहर में 45, बागपत में आठ और हापुड़ में एक नई हिस्ट्रीशीट खोली गई। वहीं मेरठ में 268, बुलंदशहर में 220, बागपत में 184 और हापुड़ में 101 हिस्ट्रीशीटर जेल में निरुद्ध पाए गए।

डीआईजी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपनिरीक्षक स्तर से हिस्ट्रीशीटरों का नियमित सत्यापन कराया जाए और सक्रिय अपराधियों के खिलाफ प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई की जाए।

दस या अधिक मुकदमों वाले अपराधियों पर रहेगी विशेष निगरानी

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समीक्षा बैठक में निर्देश दिए गए कि जिन अपराधियों के खिलाफ दस या उससे अधिक मुकदमे दर्ज हैं, उनकी हिस्ट्रीशीट प्राथमिकता के आधार पर खोली जाए। इसके अलावा सात या उससे अधिक मुकदमों वाले अपराधियों की पहचान कर आवश्यकतानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

डीआईजी ने ‘यक्ष’ अनुप्रयोग पर दर्ज विवरण की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक हिस्ट्रीशीटर का नवीनतम फोटो, पहचान चिह्न, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, जमानतदारों का विवरण, परिजनों की जानकारी, आपराधिक इतिहास और नए मुकदमों की जानकारी समय-समय पर अपडेट की जाए। साथ ही क्षेत्राधिकारी और पुलिस अधीक्षक स्तर से नियमित औचक जांच कर अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

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