लखनऊ (शिखर समाचार)।
16वें वित्त आयोग के अनुदान विषय पर आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हुए केंद्र सरकार से वित्त आयोग की शर्तों और दिशा-निर्देशों में व्यावहारिक सुधार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंचायतों के प्रभावी संचालन और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए अनुदान व्यवस्था को राज्यों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना आवश्यक है।
वित्त आयोग की बढ़ी हुई धनराशि का स्वागत
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने 15वें वित्त आयोग की तुलना में स्थानीय निकायों के लिए लगभग दोगुनी धनराशि का प्रावधान किया है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में देश की सबसे अधिक 57,694 ग्राम पंचायतें हैं, जो देश की कुल ग्राम पंचायतों का लगभग 22 प्रतिशत हैं। राज्य सरकार कम आबादी वाली पंचायतों को स्वावलंबी बनाने के लिए ‘पंचायत प्रतिपूर्ति एवं प्रोत्साहन योजना’ संचालित कर रही है, जिसके तहत पंचायतों द्वारा अर्जित आय का पांच गुना प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
अनुदान वितरण और शर्तों में सुधार की मांग
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ओपी राजभर ने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य वित्त आयोग के माध्यम से पंचायतों को 14,997 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जबकि 16वें वित्त आयोग के तहत उत्तर प्रदेश को केवल 10,675 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्रीय करों में हर वर्ष होने वाली वृद्धि को देखते हुए अनुदान का आवंटन भी एकमुश्त करने के बजाय प्रतिवर्ष बजटीय हिस्सेदारी के आधार पर किया जाए।
मंत्री ने ग्राम पंचायतों के लिए प्रति व्यक्ति 1200 रुपये की न्यूनतम आय की पात्रता शर्त को अव्यावहारिक बताते हुए इसे शहरी निकायों की तरह सरल और समान बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अधिकांश पंचायतों के अपने संसाधन सीमित हैं, इसलिए वर्तमान व्यवस्था उनके लिए कठिन साबित हो रही है।
तकनीकी समस्याओं और भुगतान व्यवस्था पर चिंता
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उन्होंने यह भी कहा कि टाइड और अनटाइड मदों की दिशा-निर्देश अभी तक जारी नहीं होने तथा ई-ग्राम स्वराज पोर्टल की तकनीकी बाधाओं के कारण पेयजल व्यवस्था, विकास कार्यों और पंचायत सहायकों व सामुदायिक शौचालयों के केयरटेकरों के मानदेय का भुगतान प्रभावित हो रहा है। उन्होंने पूर्व की तरह 10 प्रतिशत तकनीकी एवं प्रशासनिक मद को फिर से लागू करने की मांग की, ताकि पंचायतों के संचालन में कोई व्यवधान न आए।
मंत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार इन व्यावहारिक समस्याओं का समय रहते समाधान करती है तो वित्त आयोग का अनुदान ग्रामीण विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और सुशासन को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
